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September 6, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

एचओ कोटा फर्जीवाड़ा पर रेलवे सख्त : टिकट कन्फर्म होने से पहले यात्रियों को आएगा कॉल, जवाब गलत मिलने पर होगी पूछताछ

जबलपुर। रेलवे में एचओ (हेडक्वार्टर कोटा) के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए रेलवे प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। अब मुख्यालय कोटे से टिकट कन्फर्म होने से पहले यात्रियों को रैंडम कॉल किया जाएगा। इस कॉल में रेल कर्मचारी पूछेगा कि टिकट किस माध्यम से और कैसे मिला। यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो कोटा निरस्त कर दिया जाएगा और भेजने वाले से पूछताछ होगी।

रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में देशभर के सभी जोनों को निर्देश भेज दिए हैं। अब महत्वपूर्ण ट्रेनों में टीटीई रैंडम आधार पर जांच करेगा और कोटा से टिकट पाने वाले यात्रियों से पूछताछ की जाएगी। यह कदम कोटे के गलत उपयोग और दलालों की भूमिका पर नकेल कसने के लिए उठाया गया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

हाल ही में एक मामला सामने आया था, जिसमें 6 जून को गोरखपुर से एलटीटी जा रही दादर एक्सप्रेस में एक ही पीएनआर पर पांच टिकट एचओ कोटा से कन्फर्म हुए थे। ये टिकट रेल राज्यमंत्री के पीए-2 के फर्जी फैक्स से भेजे गए थे। जांच के दौरान टीटीई ने जब यात्रियों से पूछताछ की, तो उन्होंने बताया कि एक एजेंट को प्रति टिकट 5,500 रुपये दिए गए थे। यानी कुल 27,500 रुपये की अवैध वसूली की गई थी।

इसी तरह एक वरिष्ठ रेल अधिकारी के फर्जी लेटरहेड से भी एचओ कोटा में टिकट कन्फर्म कराने का मामला पकड़ा गया था। इन मामलों के सामने आने के बाद रेलवे ने सख्ती से जांच और नियमों में बदलाव शुरू कर दिया है।

कोटा आवंटन पर अब विशेष निगरानी

रेलवे प्रशासन ने दूसरे विभागों से आने वाले आवेदनों की स्क्रूटनी भी शुरू कर दी है। अब सभी आवंटन पर विशेष नजर रखी जाएगी। फर्जी लेटरपैड और अनाधिकृत एजेंटों के जरिए टिकट कन्फर्म कराने वालों पर सीधे कार्रवाई की जाएगी।

हर ट्रेन में होगी कोटे की जांच

रेलवे ने यह भी निर्णय लिया है कि हर ट्रेन में टीटीई द्वारा कोटा की जांच की जाएगी। टीटीई किसी भी कोटे से आवंटित सीट पर जाकर यात्री से पूछताछ करेगा कि टिकट कैसे मिला और किसने दिलवाया। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो तत्काल कोटा रद्द कर दिया जाएगा।

कोटा सेल में बाहरियों का प्रवेश बंद

गोरखपुर स्थित कोटा सेल में अब सिर्फ अधिकृत कर्मचारी ही प्रवेश कर सकेंगे। बाहरी कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। रेलवे की जांच टीमें हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताएं रोकी जा सकें।

रेलवे का यह सख्त कदम कोटे के पारदर्शी आवंटन को सुनिश्चित करने के साथ-साथ दलालों और भ्रष्ट तंत्र पर चोट करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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