Jabalpur News Today। आदिवासी बहुजन अधिकार कल्याण संघ (ABAKS) के नेतृत्व में ओबीसी वर्ग को संविधान प्रदत्त 27% आरक्षण लागू करने एवं संविधान की मूल आत्मा की रक्षा की मांग को लेकर एक विशाल रैली निकाली गई। यह रैली सिविक सेंटर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों — मालवीय चौक, करमचंद चौक, बड़ी ओमती होते हुए घंटाघर पहुँची, जहाँ नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया। तत्पश्चात महामहिम राष्ट्रपति के नाम दो सूत्रीय मांगों को लेकर अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।
संविधान से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं: युवा वर्ग का आह्वान
रैली में बड़ी संख्या में छात्र-युवा हाथों में तख्तियां लिए संविधान विरोधी बयानों के खिलाफ नारे लगाते हुए शामिल हुए। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
ज्ञापन में उठाईं दो प्रमुख मांगें
ज्ञापन में प्रमुख रूप से दो मांगों को रेखांकित किया गया:
-
संविधान अपमान को दंडनीय अपराध घोषित किया जाए – ज्ञापन में कहा गया कि संविधान निर्माता डॉ. बाबा साहब अंबेडकर के खिलाफ आए दिन आपत्तिजनक बयानबाजी होती है, जो कि सामाजिक सद्भाव के लिए खतरा बन रही है। विशेष रूप से कुछ तथाकथित संत, वकील, और आरएसएस से जुड़े व्यक्तियों द्वारा संविधान की मूल आत्मा – धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद – पर सवाल उठाकर तनाव फैलाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे कृत्यों को न्यायालय की अवमानना की तरह गंभीर अपराध घोषित किया जाए।
-
ओबीसी को 27% आरक्षण तुरंत बहाल किया जाए – मध्यप्रदेश में ओबीसी वर्ग को अभी तक पूर्ण 27% आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। हाईकोर्ट द्वारा 13% आरक्षण पर रोक लगी हुई है, जिससे युवाओं का भविष्य अधर में है। ज्ञापन में मांग की गई कि प्रदेश सरकार इस पर शीघ्र निर्णय लेकर पूर्ण 27% आरक्षण लागू करे।
विचारशील संबोधन और सामाजिक समरसता का संदेश
घंटाघर में हुई नुक्कड़ सभा में वक्ताओं ने संविधान, सामाजिक न्याय, और पिछड़े वर्गों के अधिकारों पर विस्तृत रूप से अपने विचार रखे। संविधान की मूल भावना को अक्षुण्ण रखने का आह्वान किया गया।
सैकड़ों कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि हुए शामिल
इस अवसर पर समाजसेवी, वकील, छात्र नेता, पूर्व जनप्रतिनिधि सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। प्रमुख उपस्थित लोगों में देवेश कुमार चौधरी, पूर्व विधायक विनय सक्सेना, एड. तेजकुमार भगत, डॉ. शिवनाथ चौधरी, आलम तरुण, रोहितास कमलेश धपोड़कर, एड. अशोक बैन, बी.एल. झारिया, रामरतन यादव, रुक्मिणी गोटियां, सिद्धार्थ खरे, बैजनाथ पटेल, राजेश सोनकर, शिवकुमार गोटियां, संजय अहिरवार, टीकाराम कोष्टा, सोमरू कोल, जितेंद्र कुर्मी, राजेंद्र पिल्ले, चमन पासी, धर्मेंद्र कुशवाहा, और अन्य शामिल रहे।
संघर्ष रहेगा जारी
सभा में यह संकल्प लिया गया कि जब तक संविधान की गरिमा सुरक्षित नहीं होती और ओबीसी को न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन चरणबद्ध रूप से चलता रहेगा।


