नई दिल्ली ,05 अगस्त। अहमदाबाद ट्रैफिक पुलिस द्वारा लगाए गए पोस्टरों ने विवाद छेड़ दिया है। अहमदाबाद में लगाए गए पोस्टरों में महिलाओं को बलात्कार से बचने के लिए घर पर रहने का आग्रह किया गया है। अहमदाबाद ट्रैफिक पुलिस द्वारा पोस्टर के जरिए यह आग्रह किया गया है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए इस तरह का अभियान प्रायोजित पोस्टरों ने विवाद खड़ा कर दिया है। शहर के कुछ इलाकों में चिपकाए गए। इन पोस्टरों की विपक्ष ने आलोचना की है। इन पोस्टरों को शहर के कुछ इलाकों में लगाया गया था, जिनमें लिखा था, ‘देर रात पार्टी में न जाएं, आपके साथ बलात्कार या सामूहिक बलात्कार हो सकता है। ‘अपने दोस्त के साथ अंधेरे और सुनसान इलाके में न जाएं, अगर उसके साथ बलात्कार या सामूहिक बलात्कार हो गया तो यह पोस्टर सोला और चांदलोडिया इलाकों में सड़क डिवाइडर पर लगाए गए थे, जिन्हें अब हटा लिया गया है। पुलिस उपायुक्त (पश्चिम यातायात) नीता देसाई ने स्पष्ट किया कि ट्रैफिक पुलिस ने केवल सड़क सुरक्षा से जुड़े पोस्टरों को प्रायोजित किया था, न कि महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित पोस्टरों को प्रायोजित किया गया था।
उन्होंने दावा किया कि ‘सतर्कता ग्रुप नामक एक एनजीओ ने ट्रैफिक पुलिस की सहमति के बिना विवादित पोस्टर बनाए और लगाए। देसाई ने कहा, ‘एनजीओ ने हमसे संपर्क किया था और कहा था कि वे स्कूलों और कॉलेजों में यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना चाहते हैं और इसके लिए वे हमारे कर्मचारी की सहायता चाहते हैं। उन्होंने हमें केवल यातायात जागरूकता से जुड़े पोस्टर दिखाए थे, ये विवादित पोस्टर नहीं। ये हमारी जानकारी के बिना लगाए गए और जैसे ही हमें पता चला, हमने इन्हें तुरंत हटवा दिया। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर निशाना साधा है। आप ने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। आप ने एक बयान में कहा, ‘गुजरात में महिलाओं के सशक्तीकरण की बात करने वाली भाजपा सरकार की हकीकत कुछ और ही है। पिछले तीन सालों में राज्य में 6,500 से अधिक बलात्कार और 36 से अधिक सामूहिक बलात्कार के मामले दर्ज हुए हैं। औसतन हर दिन पांच से अधिक बलात्कार होते हैं।


