आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनियाभर में जारी बहस के बीच, प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी निवेशक विनोद खोसला ने एक चौंकाने वाला अनुमान लगाया है। उनका दावा है कि अगले पांच वर्षों के भीतर लगभग 80 प्रतिशत नौकरियां खत्म हो सकती हैं, और इन कार्यों को पूरी तरह से AI आधारित सिस्टम संभाल लेंगे।
खोसला का यह बयान तकनीकी क्षेत्र में हो रहे तेज़ बदलावों की ओर एक स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि जिस तरह दशकों पहले कंप्यूटर के आगमन ने कार्यशैली को बदल दिया था, उसी तरह अब AI भी हमारे पेशेवर जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाला है।
नौकरियों पर मंडराता खतरा या नई संभावनाओं का द्वार?
AI को लेकर समाज दो हिस्सों में बंटा दिख रहा है। एक वर्ग को आशंका है कि इससे करोड़ों लोगों की रोज़गार छिन सकती है, जबकि दूसरा वर्ग मानता है कि AI से कार्य पहले से कहीं अधिक तेज़, सरल और पारदर्शी होंगे। उदाहरण के तौर पर, डाटा एंट्री, कस्टमर सपोर्ट, अनुवाद, लेखन, डिज़ाइनिंग, और कोडिंग जैसे कामों में AI पहले ही बड़ी भूमिका निभाने लगा है।
AI ले लेगा 80% नौकरियों का स्थान
विनोद खोसला का मानना है कि आने वाले समय में 80 फीसदी नौकरियों में लगे लोगों के कार्यों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक पूरी तरह से संभाल लेगी। इसका अर्थ यह नहीं है कि रोजगार पूरी तरह खत्म हो जाएंगे, लेकिन पारंपरिक नौकरी की परिभाषा जरूर बदल जाएगी।
छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सलाह: जनरलिस्ट बनें, न कि सिर्फ विशेषज्ञ
खोसला ने सिर्फ चेतावनी नहीं दी, बल्कि छात्रों और युवाओं को एक अहम सलाह भी दी है। उनके अनुसार, भविष्य में सिर्फ किसी एक विषय में विशेषज्ञता रखने वाले लोग सीमित हो सकते हैं, क्योंकि AI विशेष कार्यों को खुद करने में सक्षम होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों को जनरलिस्ट (Generalist) बनने पर ध्यान देना चाहिए — यानी विभिन्न विषयों और क्षेत्रों की विस्तृत समझ होना आवश्यक है।
उनका मानना है कि बहु-क्षेत्रीय ज्ञान और लचीलापन ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत होगी। ऐसे लोग जो विभिन्न समस्याओं को समझने और हल करने में सक्षम होंगे, वे AI के साथ बेहतर तालमेल बिठा पाएंगे और लगातार बदलती दुनिया में खुद को प्रासंगिक बनाए रख सकेंगे।


