त्रिशूर (केरल), 4 सितम्बर। युवा कांग्रेस चोवननूर विधानसभा अध्यक्ष वी.एस. सुजीत की पुलिस हिरासत में हुई पिटाई के मामले में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि पुलिस अधिकारियों को कमजोर धाराओं और औपचारिक सजा देकर बचाने की कोशिश की गई।
कुनमंगलम थाने के सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर दिखाई देने वाली निर्मम पिटाई के बावजूद पुलिस अधिकारियों पर केवल आईपीसी की धारा 323 लगाई गई, जो “स्वेच्छा से चोट पहुँचाने” का मामूली अपराध है और इसमें अधिकतम एक साल की सजा का प्रावधान है।
विभाग द्वारा प्राप्त कानूनी राय में कहा गया कि चूंकि चारों अधिकारियों को पहले ही दो साल तक वेतनवृद्धि रोके जाने और तीन साल तक प्रमोशन पर रोक की सजा दी जा चुकी है, इसलिए आगे कोई विभागीय कार्रवाई संभव नहीं है।
इससे दोषियों को कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचा लिया गया।
एक जांच रिपोर्ट में भी माना गया कि कार्रवाई “केवल नाममात्र की” थी, क्योंकि जांच के दौरान किसी भी आरोपी को निलंबित तक नहीं किया गया।
एसीपी के.सी. सेठ की रिपोर्ट में उन पुलिसकर्मियों की पहचान की गई जिन्होंने सुजीत की पिटाई की थी—सब इंस्पेक्टर नुहमान, सीनियर सीपीओ शशिधरन और सीपीओ संदीप व सजीव।
सुजीत ने आरोप लगाया कि मामले को दबाने की कोशिश में उन्हें और स्थानीय नेता वर्गीज चोवननूर को 20 लाख रुपये तक का hush money (चुप रहने का पैसा) देने का प्रयास किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि उस समय पुलिस चालक रहे और अब राजस्व विभाग में कार्यरत सुहैर ने भी पिटाई में हिस्सा लिया, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सुजीत ने कहा, “मैंने समझौता करने से इंकार कर दिया और कानूनी रास्ता अपनाने पर जोर दिया।” उन्होंने मांग की कि सभी पांच अधिकारियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए।
विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने गुरुवार को कहा कि पुलिस को मुख्यमंत्री विजयन के दफ्तर में बैठे एक गुट द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी की मांग है कि सभी दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत सेवा से बर्खास्त किया जाए। अगर राज्य सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो हम अभूतपूर्व विरोध-प्रदर्शन करेंगे। पुलिस प्रमुख का दिया गया स्पष्टीकरण अस्वीकार्य है और दोषियों को बचाने की कोशिश लगता है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
यह घटना 5 अप्रैल 2023 की है, जब सुजीत ने एक स्थानीय मेले में अपने दोस्तों को धमका रहे पुलिस अधिकारियों का विरोध किया था।
इसके बाद उन्हें कुनमंगलम थाने ले जाया गया, शर्ट उतार दी गई और कई पुलिसकर्मियों ने उनकी बेरहमी से पिटाई की। सीसीटीवी फुटेज, जो दो साल की कानूनी लड़ाई और सूचना आयोग के आदेश के बाद ही सामने आया, में दिखता है कि सुजीत को झुकाकर बार-बार उनके शरीर और चेहरे पर मारा गया।
जब यह वीडियो सामने आया तो जनाक्रोश फैल गया और त्रिशूर डीआईजी हरीशंकर ने डीजीपी को रिपोर्ट सौंप दी।
हालांकि अधिकारियों को केवल हल्की सजा दी गई और रिपोर्ट में उनके अपराध को “हाथ से मारना” बताया गया।
मामला वर्तमान में कुनमंगलम कोर्ट की सीधी जांच में है, जो आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगा।
सुजीत और उनके समर्थकों के लिए यह संघर्ष अभी जारी है।
उन्होंने घोषणा की है, “जब तक दोषियों को सेवा से हटाया नहीं जाता, हम अपनी लड़ाई खत्म नहीं करेंगे।” इस बीच त्रिशूर में कांग्रेस के नेतृत्व में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं।


