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September 20, 2026
सी टाइम्स
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एमपी में मेलियोडोसिस का खतरा बढ़ा ; सीएम मोहन यादव ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

भोपाल, 19 सितम्बर। एम्स-भोपाल की चिंताजनक रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मेलियोडोसिस के बढ़ते खतरे पर सख्त रुख अपनाते हुए इसके प्रसार को रोकने के लिए त्वरित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। यह घातक बैक्टीरियल बीमारी तपेदिक (टीबी) जैसी दिखती है और मध्य प्रदेश के धान किसानों के लिए बड़ा खतरा बनकर उभर रही है।

एम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 20 से अधिक जिलों में मेलियोडोसिस के पुष्ट मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि धान की खेती के विस्तार और जल स्रोतों में वृद्धि से बैक्टीरिया बर्कहोल्डेरिया स्यूडोमलई के पनपने की स्थिति बनी है, जो दूषित मिट्टी और रुके हुए पानी में जीवित रहता है।

धान के खेतों में नंगे पांव काम करने वाले किसानों को इसका सबसे ज्यादा खतरा है। इसके अलावा मधुमेह से पीड़ित और अत्यधिक शराब का सेवन करने वाले लोग भी अधिक संवेदनशील हैं।

किसानों और ग्रामीणों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित सीएम यादव ने स्वास्थ्य और कृषि विभाग के प्रमुख सचिवों को संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। यह अभियान जांच, इलाज और जनजागरूकता पर केंद्रित होगा।

सीएम यादव ने कहा, “किसानों और आम जनता का स्वास्थ्य और समृद्धि हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उन्होंने आश्वासन दिया कि गरीब और वंचित वर्ग की सुरक्षा के लिए सरकार हरसंभव कदम उठाएगी।

स्वास्थ्य और कृषि विभाग को संभावित और प्रभावित क्षेत्रों में मामलों की जांच करने का दायित्व सौंपा गया है। गांवों में अलर्ट जारी किए जाएंगे और किसानों को लक्षणों व बचाव उपायों की जानकारी दी जाएगी। यदि किसी व्यक्ति में लगातार बुखार, पुरानी खांसी या सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं, और टीबी के इलाज से भी लाभ नहीं होता है, तो तुरंत मेडिकल जांच की जाएगी।

इसी के साथ, एम्स भोपाल ने पूरे राज्य में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया है ताकि वे इस बीमारी को समय रहते पहचानकर सही इलाज कर सकें। मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों के चिकित्सकों को मेलियोडोसिस और टीबी में फर्क पहचानने और उचित एंटीबायोटिक देने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मानसून के बाद की कृषि सीजन को देखते हुए सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे पानी भरे खेतों में काम करते समय सावधानी बरतें और किसी भी अज्ञात श्वसन संबंधी लक्षण पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लें। समय पर पहचान और इलाज से ही मौतों को रोका जा सकता है।

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