29.9 C
Jabalpur
September 18, 2026
सी टाइम्स
व्यापार

रणनीतिक साझेदार होने के बावजूद चीन-ईरान के बीच ब्र‍िक्‍स सम‍िट में नहीं द‍िखी नजदीक‍ी: र‍िपोर्ट



नई दिल्ली, 18 सितंबर चीन भले ही ईरान का सबसे अहम आर्थिक साझेदार है, लेकिन बीजिंग ने अपनी व्यापक मध्य पूर्व रणनीति को तेहरान के साथ जोड़ने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

एमबीएन न्यूज वेबसाइट पर छपे एक लेख के मुताबिक, पिछले हफ्ते दिल्ली में हुए ब्र‍िक्‍स शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से दूरी बनाए रखी। इस मौके पर दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक तौर पर कोई बातचीत नहीं हुई।

जिम स्नाइडर ने अपने लेख में लिखा, “शी जिनपिंग भारत में एक दिन से भी कम समय तक रहे। उन्होंने मेजबान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और अपनी सुरक्षा और शासन से जुड़ी पहल के लिए ग्लोबल साउथ के देशों का समर्थन पाने की भी संक्षिप्त कोशिश की। ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है कि उन्होंने पेजेश्‍क‍ियन से बात की हो। यह उन दो देशों के बीच एक साफ दूरी दिखाता है, जिन्हें अक्सर रणनीतिक साझेदार के तौर पर पेश किया जाता है।”

एमबीएन के पहले ‘ग्रेट पावर्स इंडेक्स’ में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका यानी एमईएनए क्षेत्र के किसी भी दूसरे देश के मुकाबले ईरान को चीन के ज्यादा करीब बताया गया है। हालांकि, लेख के मुताबिक दोनों देशों के रिश्ते आंकड़ों में जितने सीधे दिखते हैं, असल में उससे कहीं ज्यादा जटिल हैं।

लेख में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि चीन इस समय यह दिखाना नहीं चाहता कि वह ईरान के बहुत ज्यादा करीब है। इसके उलट, शी जिनपिंग ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति अपना समर्थन कहीं ज्यादा खुलकर दिखाया है।

चीनी राष्ट्रपति की यह दूरी पिछले महीने किर्गिस्तान के बिश्केक में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भी दिखाई दी थी। लेख में कहा गया, “शी जिनपिंग ने पुतिन, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव और किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव के साथ औपचारिक बैठकें कीं, जिनकी तस्वीरें भी सामने आईं। वहीं पेजेश्कियन के साथ उनकी सिर्फ एक छोटी सी मुलाकात हुई और उन्हें काफी कम तवज्जो मिली।”

लेख में कहा गया है कि चीन और ईरान के रिश्तों की सबसे बड़ी वजह हमेशा आर्थिक हित रहे हैं। चीन को ईरान से सस्ता तेल मिलता रहा है, जबकि ईरान को इससे बेहद जरूरी कमाई और चीनी सामान तक पहुंच मिली।

ईरान किसी भी दूसरे देश के मुकाबले चीन को सबसे ज्यादा निर्यात करता है और चीनी सामान के आयात पर भी काफी निर्भर है। हालांकि, लेख के मुताबिक यह बराबरी का रिश्ता नहीं है, क्योंकि चीन के कुल वैश्विक व्यापार में ईरान की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम है।

लेख में बताया गया है कि चीन और ईरान ने 2021 में 25 साल का सहयोग समझौता किया था। इसमें ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, व्यापार और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल था। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच निवेश का स्तर काफी कम रहा है।

अन्य ख़बरें

भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में 7 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद: रिपोर्ट

Newsdesk

‘पीएम मोदी हमेशा भारत को सबसे पहले रखते हैं’, साउथ के सितारों ने दी जन्मदिन की बधाई

Newsdesk

‘टाटा संस का मॉडल बचाना होगा’: टाटा ट्रस्ट्स ने आईपीओ का किया विरोध, अन्य विकल्पों पर विचार की मांग

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading