इंदौर, 22 सितम्बर। भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाला इंदौर एक बार फिर उदाहरण पेश कर रहा है। सोमवार को शहर ने ‘नो कार डे’ मनाया, जो वाहन प्रदूषण कम करने और सतत जीवनशैली को प्रोत्साहित करने की एक महत्वपूर्ण पहल है।
पिछले तीन वर्षों से इंदौर इस दिन को लगातार मना रहा है और हर साल इसे नागरिकों का और अधिक समर्थन मिलता जा रहा है।
इस अवसर पर लोग अपनी कारों का इस्तेमाल छोड़कर पैदल चलना, साइकिल चलाना और सार्वजनिक परिवहन का सहारा ले रहे हैं। सामान्य दिनों में व्यस्त रहने वाली सड़कों पर इस दिन शांति और हरियाली का माहौल नजर आया। लोग पूरे उत्साह और नागरिक जिम्मेदारी की भावना के साथ इस दिन को मना रहे हैं।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, “नो कार डे केवल एक दिन प्रदूषण घटाने का अभियान नहीं है, बल्कि यह एक मानसिकता विकसित करने की कोशिश है, जिसमें स्वच्छ हवा और स्वस्थ जीवनशैली को महत्व दिया जाता है। इंदौर हमेशा स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी में अग्रणी रहा है और यह पहल पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में हर साल अधिक से अधिक लोग जुड़ रहे हैं। स्कूल, कॉलेज, कारोबारी संस्थान और स्थानीय संगठन इस अभियान को बढ़ावा दे रहे हैं। कई संस्थानों ने अपने कर्मचारियों और छात्रों को कार छोड़कर पर्यावरण–अनुकूल यातायात साधनों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
स्थानीय एनजीओ और स्वयंसेवकों ने शहरभर में जागरूकता शिविर लगाए, जहां पर्चे बांटे गए और लोगों से कार्बन उत्सर्जन घटाने के फायदों पर चर्चा की गई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस मुहिम में हिस्सा लिया और बताया कि पैदल चलना और साइकिल चलाना हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और तनाव घटाता है।
नागरिकों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए और सुबह की सैर, साइकिल राइड और बिना कार के सफर की तस्वीरें पोस्ट कीं।
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने भी इस अवसर पर संदेश दिया और वे खुद दोपहिया वाहन से ड्यूटी पर पहुंचे।
#NoCarDayIndore हैशटैग शहरभर में ट्रेंड करता रहा, जो इस पहल को लेकर इंदौरवासियों की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
स्वच्छता और शहरी नवाचार के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित करने वाला इंदौर, ‘नो कार डे’ के जरिए पर्यावरण–अनुकूल और स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ने का संदेश दे रहा है।


