जनविरोधी, दिशाहीन और आम जनता के साथ छलावा है। यह बजट किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं और मध्यम वर्ग की पीड़ा को समझने में पूरी तरह विफल रहा है। महंगाई आसमान छू रही है, बेरोज़गारी चरम पर है, लेकिन सरकार ने इन बुनियादी समस्याओं पर कोई ठोस रोडमैप देने के बजाय केवल आंकड़ों का खेल दिखाया है।
किसानों की लागत बढ़ रही है, खाद-बीज और डीज़ल महंगे हो चुके हैं, लेकिन एमएसपी की कानूनी गारंटी और किसानों की आय दोगुनी करने जैसे वादों पर बजट पूरी तरह मौन है। मनरेगा जैसी योजना, जो ग्रामीण गरीबों की जीवनरेखा है, उसके बजट में वास्तविक बढ़ोतरी न होना यह साबित करता है कि सरकार को ग्रामीण भारत की चिंता नहीं है।
युवाओं के लिए रोजगार सृजन के नाम पर केवल खोखले भाषण और योजनाओं की घोषणाएं की गई हैं। न तो स्थायी नौकरियों का ज़िक्र है, न ही भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर कोई भरोसा। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कटौती करके सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका झुकाव आम आदमी की बजाय बड़े उद्योगपतियों की ओर है।
यह बजट कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाला और सामाजिक न्याय की अवधारणा को कमजोर करने वाला बजट है। दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, महिलाओं और गरीब तबकों के लिए बजट में कोई ठोस और सम्मानजनक प्रावधान नहीं किया गया है।
कांग्रेस पार्टी इस बजट को सिरे से खारिज करती है। हम सरकार की इस जनविरोधी सोच के खिलाफ आवाज़ बुलंद करेंगे और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेंगे।


