जबलपुर। बरगी तहसील अंतर्गत पटेल तिराहे पर अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई उस समय विवाद का कारण बन गई, जब स्टे ऑर्डर के बावजूद कार्रवाई जारी रखने का आरोप लगाते हुए एक व्यापारी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई और आक्रोशित व्यापारियों व स्थानीय लोगों ने कई घंटों तक बरगी थाने का घेराव कर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
मृतक व्यापारी की पहचान मिंटू अग्रवाल के रूप में हुई है। मृतक के भाई मनोज अग्रवाल और स्थानीय व्यापारी बालकृष्ण अग्रवाल का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर उच्च न्यायालय से स्टे ऑर्डर जारी किया गया था, इसके बावजूद मौके पर मौजूद तहसीलदार और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार “10 मिनट में दुकान खाली करने” का दबाव बनाया जा रहा था। परिजनों का आरोप है कि अधिकारियों ने स्टे ऑर्डर को मानने से साफ इनकार कर दिया और मानसिक दबाव की स्थिति में मिंटू अग्रवाल की अचानक तबीयत बिगड़ गई।
परिजनों के अनुसार अत्यधिक तनाव और दबाव के कारण व्यापारी को सीने में तेज दर्द उठा और मौके पर ही उनकी हालत गंभीर हो गई। उन्हें संभालने का प्रयास किया गया, लेकिन हृदय गति रुक जाने से उनकी मौत हो गई। घटना के बाद व्यापारियों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने प्रशासन पर सीधे तौर पर मौत का जिम्मेदार होने का आरोप लगाया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिरिक्त तहसीलदार पूर्णिमा खड़ायत, पटवारी और पुलिस अधिकारियों द्वारा बेवजह सख्ती दिखाई गई, जबकि व्यापारी प्रशासन की कार्रवाई में सहयोग कर रहे थे। इसके बावजूद स्टे ऑर्डर की अनदेखी कर दबाव बनाया गया, जिससे यह दुखद घटना घटी।
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे अतिरिक्त कलेक्टर ऋषभ जैन ने बताया कि मृतक का पोस्टमार्टम कराया गया है और पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना तिवारी ने बताया कि मृतक के परिजनों की ओर से लिखित शिकायत प्राप्त हुई है, जिसमें जिन अधिकारियों के नाम और घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है, उनकी गहनता से जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या दबाव की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
व्यापारी की मौत के बाद आक्रोशित लोगों ने बरगी थाने का कई घंटों तक घेराव कर दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा। प्रदर्शनकारी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करते रहे। पुलिस द्वारा समझाइश के प्रयास किए गए, लेकिन काफी देर तक हालात काबू में नहीं आ पाए।
फिलहाल प्रशासन और पुलिस दोनों ही मामले को संवेदनशील मानते हुए जांच की बात कह रहे हैं, जबकि क्षेत्रीय व्यापारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।


