जबलपुर। गौरीघाट स्थित साकेतधाम में श्री रामेश्वरम महादेव के 22वें पाटोत्सव के अवसर पर भव्य संत समागम का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से आए संतों और विद्वानों ने धर्म, भक्ति और वैराग्य पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
संत समागम को संबोधित करते हुए स्वामी मुक्तानंद जी ने कहा कि भगवान शिव, विष्णु, ब्रह्मा, शक्ति, राम और कृष्ण सभी एक ही परम सत्ता के विभिन्न स्वरूप हैं। नाम और रूप में भेद हो सकता है, लेकिन तत्व एक ही है। किसी भी नाम से ईश्वर की आराधना करने से वही सच्चिदानंद परमात्मा की उपासना होती है। उन्होंने कहा कि जैसे व्याकुल व्यक्ति को विश्राम की आवश्यकता होती है, वैसे ही जब पाप बढ़ जाते हैं तो ईश्वर संहार के माध्यम से संसार को संतुलन प्रदान करते हैं।
पंडित उमाशंकर शर्मा व्यास ने कहा कि भगवान शिव को पशुपति कहा जाता है, अर्थात वे समस्त जीवों के देवता हैं। इसी कारण उनके विवाह में पशु-पक्षी, कीट-पतंग, यहां तक कि भूत-पिशाच और विक्षिप्त जन भी उपस्थित हुए थे, जो शिव की करुणा और व्यापकता का प्रतीक है।
स्वामी गिरिशानंद सरस्वती ने वैराग्य और भक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुछ लोगों के जीवन में पहले वैराग्य आता है और फिर भक्ति का उदय होता है, जबकि कुछ में भक्ति के माध्यम से ही वैराग्य स्वतः उत्पन्न हो जाता है। दोनों ही मार्ग आत्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं।
इस अवसर पर माननीय न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार माहेश्वरी को ‘स्वामी अखंडानंद सरस्वती विशिष्ट व्यक्तित्व अलंकरण’ सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में अनेक न्यायाधीश, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
महाशिवरात्रि पर्व पर साकेतधाम में सुबह 10 बजे से भगवान शिव का अर्चन-पूजन होगा। शाम 7 बजे शिव बारात निकाली जाएगी तथा रात 10 बजे से पंडित रोहित दुबे के आचार्यत्व में 51 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा रात्रि पर्यंत चारों पहर महाअभिषेक किया जाएगा। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।


