जबलपुर। शहर में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे तमाम दावों के बीच एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। तिलवारा क्षेत्र की एक छात्रा ने दो युवकों पर पिछले दो से तीन वर्षों से लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि आरोपियों की हरकतों से वह इस कदर टूट चुकी है कि उसने दो बार आत्महत्या करने की कोशिश भी की, लेकिन परिवार के सहयोग से उसकी जान बच सकी।
पीड़िता के अनुसार जब वह रोजाना स्कूल आती-जाती है, तब सिद्धांत दुबे और लवि तिवारी नाम के दो युवक उसका रास्ता रोकते हैं। आरोप है कि ये युवक उसे जबरन रोककर परेशान करते हैं, अश्लील फोटो और वीडियो दिखाते हैं और धमकाते हुए कहीं बाहर चलने का दबाव बनाते हैं। छात्रा ने यह भी बताया कि कई बार जानबूझकर उसकी गाड़ी का एक्सीडेंट कराने की कोशिश की गई, ताकि वह डर जाए और उनकी बात मानने को मजबूर हो जाए।
मना करने पर आरोपियों ने पीड़िता को और उसके परिवार को जान से मारने की धमकियां दीं। छात्रा का कहना है कि इन धमकियों के चलते वह लगातार डर और तनाव में जी रही है, जिससे उसका पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ रहा है। मानसिक उत्पीड़न इतना बढ़ गया कि उसने दो बार अपनी जान देने की कोशिश की, लेकिन समय रहते परिजनों को जानकारी मिलने से उसकी जान बच गई।
सबसे गंभीर आरोप पुलिस प्रशासन को लेकर लगाए गए हैं। पीड़िता ने बताया कि आरोपियों में से एक के पिता पुलिस विभाग में पदस्थ हैं और इसी का फायदा उठाकर आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। छात्रा का दावा है कि उसने पहले भी थाने में शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे उसे ही समझौता करने और मामला शांत रखने का दबाव बनाया गया।
लगातार दो महीनों तक न्याय के लिए भटकने के बाद आखिरकार पीड़िता अपनी मां के साथ Jabalpur स्थित एसपी कार्यालय पहुंची और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। एसपी ऑफिस में उसने फूट-फूटकर अपनी आपबीती सुनाई और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
पुलिस अधीक्षक ने पीड़िता को भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, चाहे वे किसी भी पद या रसूख से जुड़े क्यों न हों। एसपी ने संबंधित थाना प्रभारी को तत्काल रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।
यह मामला न सिर्फ मनचलों की बढ़ती दबंगई और महिलाओं की असुरक्षा को उजागर करता है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर पीड़िता के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिस्टम के लिए एक बड़ा झटका होगा। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब महिलाएं और छात्राएं बिना डर के अपने सपनों की राह पर चल पाएंगी।


