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जबलपुर। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट व्यापार एवं एमएसएमई क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष प्रोत्साहन उपायों की अपेक्षा अधूरा प्रतीत हो रहा है। फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष हिमांशु खरे ने बताया कि
बजट में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कृषि क्षेत्र में किए गए बड़े प्रावधान राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाले हैं। सड़क, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स पर किए गए निवेश से उद्योगों की लागत में कमी आएगी और राज्य की निवेश क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी।
*कमजोर पक्ष* उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बजट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, एमएसएमई, स्टार्टअप एवं निर्यात प्रोत्साहन के लिए प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन, कर राहत या नई औद्योगिक प्रोत्साहन योजनाओं की घोषणा सीमित रही है। हिमांशु खरे के अनुसार राज्य स्तर पर उत्पादन-प्रोत्साहन योजना, औद्योगिक क्लस्टर विकास, ब्याज सब्सिडी एवं सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्रणाली को और मजबूत करने के ठोस उपायों की घोषणा की जाएगी जो कि पूर्ण नहीं हो पाई।
उन्होंने राज्य में बढ़ते ऋण और भविष्य में संभावित कर एवं शुल्क वृद्धि को लेकर भी चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से राजकोषीय संतुलन बनाए रखने का आग्रह किया।
राज्य सरकार से आग्रह किया है कि आगामी नीतियों में निजी निवेश आकर्षण, एमएसएमई सशक्तिकरण, टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों को बढ़ावा तथा निर्यातोन्मुख उद्योगों के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की जाए, ताकि मध्य प्रदेश को उद्योग एवं निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके।


