अनूपपुर। जिले के शासकीय (बालक) उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नवीन भवन निर्माण कार्य में वर्षों से हो रही देरी अब विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। वर्ष 2006 से प्रारंभ हुई उन्नयन एवं भवन निर्माण की प्रक्रिया आज तक पूर्ण नहीं हो सकी है, जिससे छात्र-छात्राओं को मूलभूत सुविधाओं के अभाव में अध्ययन करना पड़ रहा है।
*2006 से शुरू हुई प्रक्रिया, अब तक अधूरी*
उपलब्ध जानकारी के अनुसार जुलाई 2006 में विद्यालय का माध्यमिक शाला से हाईस्कूल में उन्नयन किया गया। जुलाई 2006 से अक्टूबर 2013 तक विद्यालय का संचालन पुराने भवन में प्रथम पाली में होता रहा। तत्पश्चात 07 अक्टूबर 2013 को सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास अनूपपुर के आदेशानुसार विद्यालय को हाईस्कूल भवन में संचालित किया जाने लगा।कलेक्टर अनूपपुर के आदेश पर खसरा नंबर 161/1-5/1 के अंश रकबा 0.322 हेक्टेयर भूमि विद्यालय हेतु आवंटित की गई। वर्ष 2016-17 में विद्यालय का उच्चतर माध्यमिक (हायर सेकेंडरी) में उन्नयन हुआ और 2018-19 में ₹173.25 लाख की लागत से नवीन भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई। निर्माण कार्य पीआईयू (PIU) के माध्यम से संबंधित एजेंसी को सौंपा गया।
नक्शा बदला, लेकिन कार्य शुरू नहीं
प्रारंभिक स्वीकृत नक्शा 14 कमरों का था, जिसे यू-शेप (U-Shape) में अनुमोदित किया गया। भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया पूर्ण कर अनुविभागीय अधिकारी अनूपपुर द्वारा पीआईयू को कार्य प्रारंभ हेतु सौंपा गया।
बाद में पीआईयू द्वारा प्रस्तावित नक्शे को जी+1 (G+1) स्वरूप में परिवर्तित कर पुनः अनुमोदन हेतु भेजा गया। नया नक्शा प्राप्त होने के बाद शीघ्र निर्माण प्रारंभ कराने का आश्वासन दिया गया, किंतु 01 दिसंबर 2025 तक भी निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। वर्षों से फाइलों में उलझी प्रक्रिया अब विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बन चुकी है।
*वर्तमान स्थिति चिंताजनक*
विद्यालय के वर्तमान स्थिति के अनुसार विद्यालय में वर्तमान में लगभग 4 कक्षों की कमी है। कक्षा 6वीं से 12वीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, जिनमें 11वीं एवं 12वीं के कला एवं विज्ञान संकाय भी शामिल हैं। कक्षों के अभाव में:
विद्यार्थियों को एक ही कक्ष में समायोजित करना पड़ रहा है
कई बार वैकल्पिक व्यवस्था में कक्षाएं संचालित करनी पड़ती हैं
शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है
परीक्षा एवं प्रायोगिक कार्यों में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है
विद्यालय प्रशासन सीमित संसाधनों में व्यवस्थाएं बनाने का प्रयास कर रहा है, परंतु स्थायी समाधान भवन निर्माण पूर्ण होने पर ही संभव है।
*अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों की मांग*
स्थानीय अभिभावकों एवं जनप्रतिनिधियों ने संबंधित विभाग से शीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ कर निर्धारित समय सीमा में पूर्ण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों की स्वीकृति के बाद भी वर्षों तक कार्य लंबित रहना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर है और उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना शासन-प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस लंबे समय से लंबित निर्माण कार्य को कब गति देता है और विद्यार्थियों को राहत कब तक मिल पाती


