जबलपुर। शहर के प्रमुख रियल एस्टेट समूह राजुल ग्रुप पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद बिल्डर लॉबी में हड़कंप मच गया है। जबलपुर में गुरुवार को की गई इस कार्रवाई में समूह से जुड़े तीन ठिकानों पर तलाशी ली गई।
प्रवर्तन निदेशालय के भोपाल जोनल कार्यालय ने 19 मार्च को मेसर्स राजुल ग्रुप और उसके पार्टनर प्रियांक मेहता के परिसरों पर छापा मारा। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 के तहत की गई है। जांच की शुरुआत आयकर विभाग द्वारा साझा की गई गोपनीय जानकारी के आधार पर हुई थी।
विदेशी संपत्तियों और निवेश का खुलासा
जांच में सामने आया कि प्रियांक मेहता ने लिस्बन में लगभग 5,10,000 यूरो की लागत से एक आलीशान फ्लैट खरीदा है। इस संपत्ति से किराये के रूप में नियमित आय भी प्राप्त हो रही थी, लेकिन इसका विवरण आयकर रिटर्न में नहीं दिया गया।
भारतीय नियमों के अनुसार किसी भी नागरिक को अपनी विदेशी संपत्तियों और उनसे होने वाली आय की जानकारी देना अनिवार्य होता है। इस मामले में जानकारी छिपाना गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है।
मनी ट्रेल: अमेरिका के रास्ते पुर्तगाल
ईडी की जांच में एक जटिल मनी ट्रेल का भी खुलासा हुआ है—
करीब 5,48,000 अमेरिकी डॉलर पहले एलआरएस स्कीम के जरिए अमेरिका भेजे गए
इसके बाद यह राशि पुर्तगाल ट्रांसफर की गई
इसके अलावा 4,20,998 यूरो सीधे पुर्तगाल भेजे गए
लिस्बन के बैंक खाते में अभी भी लगभग 2.1 करोड़ रुपये शेष बताए जा रहे हैं
नकदी और डिजिटल साक्ष्य जब्त
छापेमारी के दौरान प्रियांक मेहता के ठिकानों से 31 लाख रुपये नकद बरामद किए गए, जिसका संतोषजनक जवाब मौके पर नहीं दिया जा सका। साथ ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं।
बिल्डरों में दहशत, जांच का दायरा बढ़ेगा
इस कार्रवाई के बाद शहर के अन्य बिल्डरों और फाइनेंसरों में भी चिंता का माहौल है। संभावना जताई जा रही है कि जिन लोगों का राजुल ग्रुप से व्यावसायिक लेन-देन रहा है, वे भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
ईडी अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में अभी और बड़े खुलासे हो सकते हैं और मनी ट्रेल की जांच जारी है।


