जनता ने सड़क पर किया प्रदर्शन
जबलपुर। मध्य प्रदेश में बिजली की दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी को लेकर आम जनता और सामाजिक संगठनों का विरोध तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में शनिवार को जबलपुर में नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और राज्य सरकार के निर्णय पर गंभीर सवाल उठाए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रदेश सरकार बिजली दरों को बढ़ाकर आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की तैयारी कर रही है। उन्होंने इसे “जनता के साथ सौतेला व्यवहार” बताते हुए कहा कि एक ओर प्रदेश में उत्पादित बिजली को अन्य राज्यों को बेहद कम दर पर बेचा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय उपभोक्ताओं से उसी बिजली के लिए लगभग दोगुनी कीमत वसूलने की योजना बनाई जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने बिजली विभाग के हालिया आदेश का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश में उत्पन्न बिजली को अन्य राज्यों को लगभग 3.81 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेचा जा रहा है, जबकि प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए यही दर बढ़ाकर करीब 7 से 7.5 रुपये प्रति यूनिट किए जाने का प्रस्ताव है। इस अंतर को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि गर्मियों के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने पर सरकार निजी कंपनियों से महंगी दरों पर बिजली खरीदती है, लेकिन इस अतिरिक्त खर्च का बोझ सीधे आम जनता पर डालना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि सरकार बिजली दरों में वृद्धि के फैसले पर पुनर्विचार करे और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए।
मीडिया से बातचीत में एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि 26 मार्च को जारी आदेश के अनुसार नई दरें 1 अप्रैल से लागू हो सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं में चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान सरकार से पारदर्शिता बरतने, बिजली मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया सार्वजनिक करने और स्थानीय उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
कुल मिलाकर, बिजली दरों में संभावित वृद्धि का मुद्दा अब प्रदेश में एक बड़ा जनहित का विषय बनता जा रहा है, जिस पर सरकार और जनता के बीच टकराव की स्थिति बनने के संकेत मिल रहे हैं।


