June 23, 2026
सी टाइम्स
वीडियोसी टाइम्सहेल्थ एंड साइंस

एडेप्ट टॉक | सर्वाइकल कैंसर से बेटियों की सुरक्षा, एचपीवी (HPV) वैक्सीन क्यों है समय की मांग? | डॉ अमिता जैन | पैथोलॉजिस्ट विक्टोरिया चिकित्सालय जबलपुर

 

भारत में कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। महिलाओं में विशेष रूप से स्तन कैंसर और सर्वाइकल (बच्चेदानी का) कैंसर, और इसके साथ ही मुंह का कैंसर, हमारे देश में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसर के प्रकार हैं। विक्टोरिया चिकित्सालय, जबलपुर की पैथोलॉजिस्ट डॉ. अमिता जैन ने अपने हालिया संबोधन में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम— ‘एचपीवी (HPV) वैक्सीनेशन’ पर जोर दिया है।

कैंसर की गंभीरता और बचाव का सही समय

सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से ‘ह्यूमन पेपिलोमा वायरस’ (HPV) के कारण होता है । चिंता का विषय यह है कि जब तक इस कैंसर के लक्षण स्पष्ट रूप से सामने आते हैं, तब तक अक्सर यह लाइलाज स्थिति में पहुंच चुका होता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि यदि किसी भी कैंसर का प्राथमिक चरण (Primary Stage) में पता चल जाए, तो वह 100% ठीक हो सकता है।

भारत सरकार की एक सराहनीय पहल

निजी अस्पतालों और खुले बाजार में इस वायरस से बचाव की वैक्सीन काफी महंगी आती है, जिसे वहन करना हर परिवार के लिए संभव नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने किशोरियों के लिए एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है। सरकार द्वारा 14 से 15 वर्ष की बच्चियों के लिए सरकारी अस्पतालों में यह वैक्सीन बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है।

वैक्सीन से जुड़ी भ्रांतियां (Myths) और सच्चाई

समाज में अक्सर नई स्वास्थ्य पहलों को लेकर कई अफवाहें फैल जाती हैं। डॉ. जैन ने इस वैक्सीन से जुड़े भ्रमों को पूरी तरह से खारिज किया है:

  • निराधार मिथक: ऐसी भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं कि इस वैक्सीन को लगवाने से भविष्य में बांझपन (Infertility) की समस्या हो सकती है या कोई अन्य लंबी बीमारी/कैंसर पनप सकता है।

  • वैज्ञानिक सच्चाई: यह धारणा बिल्कुल गलत है। यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है।

  • सामान्य दुष्प्रभाव: बचपन में लगने वाले अन्य टीकों की तरह ही इसके प्रभाव भी बेहद सामान्य हैं। सुई लगने वाली जगह पर थोड़ा लालपन, हल्का दर्द या एक-आध दिन के लिए मामूली बुखार आ सकता है, जो कि बिल्कुल स्वाभाविक है।

निष्कर्ष: सुरक्षित भविष्य की ओर एक कदम

“स्वस्थ समाज रहेगा, तो स्वस्थ राष्ट्र रहेगा”। यह वाक्य इस पूरे अभियान का सार है। एक समाज के तौर पर यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अफवाहों और सुनी-सुनाई बातों पर ध्यान न दें। सभी अभिभावकों से यह पुरजोर अपील है कि वे अपनी 14 से 15 साल की बेटियों को नजदीकी सरकारी अस्पताल लेकर जाएं और यह मुफ्त वैक्सीन अवश्य लगवाएं। यह सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं है, बल्कि हमारी बेटियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की एक मजबूत ढाल है।

(डॉ. अमिता जैन, पैथोलॉजिस्ट, विक्टोरिया चिकित्सालय जबलपुर)

अन्य ख़बरें

क्या कम हो रही है आपकी सुनने की क्षमता? शरीर पहले ही देने लगता है ये संकेत

Newsdesk

सदर गैरिसन ग्राउंड में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का राज्य स्तरीय आयोजन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया सामूहिक योगाभ्यास

Newsdesk

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: पीएम मोदी के साथ जुड़ने के लिए 6 लाख संगठनों ने ‘योग संगम पोर्टल’ पर रजिस्ट्रेशन कराया

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading