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April 21, 2026
सी टाइम्स
व्यापार

एआई अर्थव्यवस्था को देगा बूस्ट, लेकिन अभी नहीं दिख रहा वैश्विक उत्पादकता पर खास असर: आईएमएफ



वॉशिंगटन, 14 अप्रैल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि तेजी से बढ़ रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का असर अभी तक वैश्विक उत्पादकता के आंकड़ों में साफ नजर नहीं आया है, हालांकि इस तकनीक में आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने की क्षमता है।

भारत, जापान, यूएई, नीदरलैंड और चिली के पत्रकारों के साथ एक समूह साक्षात्कार के दौरान आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरींचस ने कहा कि मौजूदा मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा में अभी एआई का असर दिखाई नहीं दे रहा है।

उन्होंने कहा, “हमारे आकलन के अनुसार अभी तक हमें उपलब्ध आंकड़ों में एआई से उत्पादकता में कोई बड़ा सुधार नजर नहीं आ रहा है।”

उन्होंने यह भी माना कि तकनीक में तेजी से प्रगति हुई है, लेकिन इसका व्यापक स्तर पर इस्तेमाल अभी सीमित है।

गौरींचस ने कहा, “हम तकनीकी प्रगति से काफी प्रभावित हैं, लेकिन इसका बड़ा आर्थिक असर अभी नहीं दिख रहा है।”

हालांकि, आईएमएफ का मानना है कि भविष्य में एआई आर्थिक विकास के लिए बड़ा सकारात्मक कारक बन सकता है। उनके अनुसार, इससे हर साल उत्पादकता वृद्धि में 0.1 से 0.4 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि कुछ अनुमान इससे भी ज्यादा हैं।

लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि इस बदलाव के दौरान खासकर रोजगार के क्षेत्र में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं।

उन्होंने कहा कि शुरुआती संकेत मिल रहे हैं कि भर्ती में थोड़ी नरमी आ रही है, खासकर एंट्री-लेवल नौकरियों में, जो एआई के असर को दिखाता है।

हालांकि उन्होंने बड़े पैमाने पर स्थायी बेरोजगारी की संभावना को खारिज किया, लेकिन कहा कि भविष्य में नौकरियों का स्वरूप काफी बदल जाएगा।

उन्होंने कहा, “हम नहीं मानते कि एआई से बड़े पैमाने पर बेरोजगारी होगी, लेकिन आने वाली नौकरियां काफी अलग होंगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि बदलाव के दौरान असमानता हो सकती है, क्योंकि पुराने रोजगार खत्म होने से पहले नए रोजगार पूरी तरह से नहीं बन पाते।

आईएमएफ ने एक और बड़ी चिंता जताई कि एआई सेक्टर में ज्यादा निवेश और बढ़े हुए वैल्यूएशन से वित्तीय अस्थिरता का खतरा भी पैदा हो सकता है।

गौरींचस ने आगे कहा कि अभी कई कंपनियां बड़े स्तर पर फंडिंग जुटा रही हैं, जबकि संभव है कि बाजार में सिर्फ कुछ ही कंपनियां टिक पाएं और बाकी बंद हो जाएं।

उन्होंने चेतावनी दी कि इससे बाजार में वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट आ सकती है, जैसा कि पहले डॉट-कॉम बबल के दौरान हुआ था।

अगर इन निवेशों में ज्यादा कर्ज शामिल हुआ, तो इसका असर बैंकिंग सिस्टम पर भी पड़ सकता है।

आईएमएफ के इस आकलन से साफ है कि एआई में जहां अपार संभावनाएं हैं, वहीं इसके साथ कई जोखिम भी जुड़े हुए हैं।

फिलहाल, तकनीकी प्रगति को लेकर उम्मीद बनी हुई है, लेकिन इसका असली फायदा कब और कितना मिलेगा, यह अभी साफ नहीं है।

नीति निर्माता और व्यवसाय इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि कर्मचारियों को नए स्किल्स सिखाए जाएं ताकि वे बदलती नौकरी की जरूरतों के अनुसार खुद को ढाल सकें, वहीं नियामक संस्थाएं बाजार में संभावित जोखिमों पर नजर बनाए हुए हैं।

जैसे-जैसे एआई का इस्तेमाल बढ़ेगा, इसका दीर्घकालिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि देश इन अवसरों और चुनौतियों को कैसे संभालते हैं।

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