परिजनों का दावा 2 से 3 घंटे तक नहीं मिली एंबुलेंस क्योंकि गाड़ियां वीआईपी ड्यूटी में थीं; विरोध प्रदर्शन के बाद जांच की बात
मध्य प्रदेश के रायसेन में सड़क हादसे में घायल पत्रकार दीपक सोनी की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, दीपक सोनी ‘स्वर्ण मंगलम’ नामक मासिक पत्रिका के संपादक थे और 10 अप्रैल को कृषि मेले में जाते समय सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि हालत नाजुक होने के बावजूद उन्हें समय पर रेफर करने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई।
परिवार का कहना है कि जिला अस्पताल में करीब 2 से 3 घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार किया गया। समय निकलता देख उन्हें निजी वाहन से भोपाल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान दीपक सोनी की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि उस समय अस्पताल की एंबुलेंसें कृषि मेले से जुड़े वीआईपी इंतजामों में लगी हुई थीं।
इस मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि रिपोर्टों के अनुसार सिविल सर्जन डॉ. यशपाल बालियान का एक कथित बयान भी सामने आया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि एंबुलेंसें वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त थीं और तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी। हालांकि इस दावे की अंतिम पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी।
घटना के बाद रायसेन में विरोध प्रदर्शन भी हुआ। प्रदर्शनकारियों और परिजनों ने जिला अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही पर कार्रवाई की मांग की। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान सीएमएचओ और एसडीएम मौके पर पहुंचे और मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
यह मामला केवल एक दुखद मौत का नहीं, बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की प्राथमिकता पर भी बड़ा प्रश्न है। यदि किसी गंभीर घायल को रेफरल के लिए घंटों इंतजार करना पड़े, तो यह सिर्फ व्यवस्थागत कमी नहीं, बल्कि जवाबदेही का मामला बन जाता है। अभी तक उपलब्ध जानकारी में सबसे बड़ा आरोप वीआईपी ड्यूटी में एंबुलेंसों की तैनाती को लेकर है, और इसी बिंदु पर निष्पक्ष जांच सबसे अधिक जरूरी है। यह अंतिम निष्कर्ष नहीं, बल्कि उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर स्थिति का विश्लेषण है।


