जबलपुर। एमपी ट्रांसको के इंजीनियरों ने राजधानी भोपाल के ई-8 अरेरा कॉलोनी स्थित 132 केवी जीआईएस सबस्टेशन में तकनीकी दक्षता का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। सीमित स्थान की चुनौती के बावजूद यहां 20 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया गया है। गैस इंसुलेटेड सबस्टेशन तकनीक पर आधारित इस केंद्र में जगह की कमी के कारण यह कार्य काफी जटिल माना जा रहा था, लेकिन इंजीनियरों ने इसे सफलतापूर्वक पूरा कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।
तकनीकी कुशलता से मिली सफलता
जीआईएस (गैस इंसुलेटेड सबस्टेशन) अपनी कॉम्पैक्ट संरचना के लिए जाने जाते हैं, जहां पारंपरिक सबस्टेशनों की तुलना में बेहद कम जगह उपलब्ध होती है। ऐसे में नए उपकरणों की स्थापना चुनौतीपूर्ण होती है। एमपी ट्रांसको की टीम ने वैज्ञानिक योजना और सटीक समन्वय के जरिए इस कार्य को अंजाम दिया। भारी-भरकम ट्रांसफार्मर को बिना किसी बाधा के स्थापित कर ग्रिड से जोड़ना इंजीनियरिंग कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।
क्षमता में हुआ बड़ा इजाफा
अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश शांडिल्य के अनुसार, इस नए ट्रांसफार्मर के शुरू होने से सबस्टेशन की कुल ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता बढ़कर 70 एमवीए हो गई है। इससे भोपाल शहर में बिजली आपूर्ति और अधिक सुदृढ़ होगी तथा बढ़ती मांग को संतुलित करने में मदद मिलेगी। खासकर गर्मी के मौसम में बढ़ते लोड को संभालने में यह विस्तार महत्वपूर्ण साबित होगा।
अब नहीं होगी अनावश्यक बिजली कटौती
इस परियोजना का एक प्रमुख लाभ वैकल्पिक बिजली व्यवस्था के रूप में सामने आया है। अब किसी तकनीकी खराबी या रखरखाव के दौरान भी बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होगी। अतिरिक्त ट्रांसफार्मर बैकअप के रूप में कार्य करेगा, जिससे उपभोक्ताओं को निरंतर बिजली मिलती रहेगी।
ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में मजबूत कदम
तेजी से बढ़ती आबादी और बढ़ती बिजली खपत को देखते हुए यह प्रोजेक्ट बेहद अहम माना जा रहा है। इस पहल से न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा, बल्कि भविष्य की मांगों के लिए भी ग्रिड को मजबूत आधार मिलेगा। एमपी ट्रांसको के इंजीनियरों का यह प्रयास बुनियादी ढांचे के विकास और तकनीकी नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है।


