जबलपुर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत एक सराहनीय पहल सामने आई है, जिसमें 11 माह की बालिका दिव्यांशी बर्मन को समय रहते उपचार मिल सका और उसकी जान बचाई जा सकी। जन्म से हृदय रोग से पीड़ित इस मासूम को आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से निःशुल्क सर्जरी का लाभ मिला और उसे नया जीवन प्रदान किया गया।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुभाष शुक्ला से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिव्यांशी बर्मन, पिता दुर्गेश बर्मन, निवासी वार्ड क्रमांक 10, ग्राम तिघरा, विकासखंड सिहोरा, जिला जबलपुर की रहने वाली है। स्वास्थ्य विभाग की टीम जब गांव में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पहुंची, तब इस गंभीर बीमारी का पता चला।
मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी के मार्गदर्शन में कार्य कर रही RBSK टीम की डॉ. संगीता कश्तवार ने जांच के दौरान पाया कि बालिका जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित है। इसके बाद तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी गई और मामले को प्राथमिकता पर लिया गया। जिला स्तर पर विशेषज्ञों से जांच कराई गई और आगे की कार्रवाई के लिए अनुशंसा की गई।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर जिला नोडल अधिकारी और संबंधित टीम ने त्वरित पहल करते हुए बालिका का पंजीयन कराया और परिजनों की सहमति के बाद उसे नारायणा हृदयालय मुंबई रेफर किया गया। वहां 22 अप्रैल 2026 को दिव्यांशी की सफल हृदय सर्जरी की गई, जो पूरी तरह निःशुल्क रही।
सर्जरी के बाद बालिका की स्थिति में सुधार है और वह स्वस्थ हो रही है। इस पूरी प्रक्रिया में स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई ने एक मासूम की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बालिका के परिजनों ने इस सहायता के लिए प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और RBSK टीम के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर यह सहायता नहीं मिलती, तो उनकी बेटी को बचा पाना मुश्किल हो सकता था।
यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि जमीनी स्तर पर सक्रिय स्वास्थ्य सेवाएं किस तरह जरूरतमंदों के लिए जीवनदायी साबित हो सकती हैं।


