April 30, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

खनिज विभाग की “कुंभकर्णी नींद”, कोलमी में रेत माफिया का राज और नियम-कानून तार-तार


कोतमा- स्वीकृत खदान छोड़कर 200 मीटर बाहर अवैध खनन, रोज दौड़ रहे 60 डंपर अफसरों ने फोन और व्हाट्सएप किए इग्नोर, थक-हारकर ग्रामीणों ने खटखटाया सीएम हेल्पलाइन का दरवाजा कोतमा- जिले में रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिन-रात नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। उपतहसील फुनगा के ग्राम कोलमी में पिछले एक महीने से अवैध खनन का खुला खेल चल रहा है और माफिया पोकलेन से सोन नदी का सीना चीर रहे हैं। जिम्मेदार खनिज विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है, जिससे शासन को हर दिन लाखों के राजस्व का चूना लग रहा है। हालात ऐसे हैं कि सबूत देने के बावजूद अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं और आम जनता की शिकायतों का उन पर कोई असर नहीं हो रहा है।:- जिले की उपतहसील फुनगा के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोलमी में इन दिनों रेत का अवैध उत्खनन अपने चरम पर है। ग्राम मोहरी में सोन नदी पर रेत खदान शासन द्वारा विधिवत स्वीकृत की गई थी, लेकिन ठेकेदार अपनी सीमा लांघ चुके हैं। ठेकेदार स्वीकृत खदान की सीमा छोड़कर कोलमी के राजस्व क्षेत्र में लगभग 200 मीटर अंदर घुसकर अवैध खनन कर रहे हैं। यहां बेखौफ तरीके से 20 से 25 फीट गहरे गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे शासन को राजस्व की भारी क्षति होने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों की भी खुलेआम लूट हो रही है।
रात के अंधेरे में दौड़ रहे ओवरलोड डंपरअवैध रेत का यह काला कारोबार दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक बेखौफ जारी रहता है। हर रात करीब 50 से 60 ओवरलोड हाईवा डंपरों के जरिए यहां से अवैध निकाली गई रेत का परिवहन किया जा रहा है। भारी वाहनों की इस अंधाधुंध आवाजाही से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सीसी सड़कें भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इसके अलावा, रात्रिकालीन समय में होने वाली इन अवैध गतिविधियों और भारी वाहनों की गड़गड़ाहट के कारण गांव वालों में भय का वातावरण बना रहता है। खनिज विभाग की संदिग्ध भूमिका और अनदेखी इस पूरे मामले में खनिज विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली बेहद संदिग्ध नजर आ रही है। ग्रामीणों का साफ आरोप है कि इतना बड़ा अवैध उत्खनन बिना विभागीय साठगांठ के संभव नहीं है। शिकायत के लिए जब जिम्मेदार अधिकारियों को कॉल किया जाता है, तो वे फोन तक रिसीव नहीं करते। थक-हारकर 25 अप्रैल 2026 को एक जागरूक ग्रामीण ने विभागीय मोबाइल नंबर (7748800182) पर व्हाट्सएप के माध्यम से फोटो और वीडियो सबूत के साथ पूरी जानकारी भेजी, फिर भी कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
72 घंटे बीते, अब CM हेल्पलाइन में शिकायतविभाग की घोर उदासीनता का आलम यह है कि फोटो-वीडियो सहित सूचना भेजने के 72 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी (28 अप्रैल 2026 तक) कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। अधिकारियों के इस रवैये और “कुंभकर्णी नींद” से व्यथित होकर अंततः ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन (शिकायत क्रमांक 38008289) का सहारा लिया है। जनता अब सवाल पूछ रही है कि क्या सीएम हेल्पलाइन की इस शिकायत के बाद खनिज महकमा जागेगा, या माफिया इसी तरह शासन को चूना लगाकर मालामाल होते रहेंगे।पर्यावरण पर खतरा, गहरा रहा पेयजल संकट माफियाओं की इस बेरोकटोक लूट से केवल सरकारी खजाने को ही नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि ग्राम कोलमी का पर्यावरण भी खतरे में पड़ गया है। अंधाधुंध खनन से सोन नदी की पारिस्थितिकी पूरी तरह नष्ट हो रही है। इस गहरे उत्खनन के कारण गांव का भू-जल स्तर तेजी से नीचे खिसक गया है, जिससे वहां भयंकर पेयजल संकट खड़ा हो गया है। अगर जल्द ही इस अवैध उत्खनन पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो ग्रामीणों को भविष्य में और भी गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ेगा।

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