जबलपुर। नर्मदा नदी में पिछले कई महीनों से चल रहे कथित दोहन और प्रदूषण के मामले में प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित कंपनी के कार्य पर रोक लगा दी है। उज्जैन की गोमती ट्रेडिंग कंपनी द्वारा नदी में पड़े पुराने रेलवे पुल के लोहे को निकालने के नाम पर नियमों की अनदेखी करते हुए नदी के बीच तक 300 से 400 मीटर लंबी अस्थायी सड़क बना दी गई थी, जिस पर भारी मशीनें जैसे क्रेन, डंपर और हाइवा चलाए जा रहे थे। साथ ही गैस वेल्डिंग के जरिए नदी के भीतर ही लोहे की कटाई की जा रही थी, जिससे गर्म धातु और रसायन सीधे नदी में मिल रहे थे और जलीय जीवों को नुकसान पहुंच रहा था।
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच दल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कंपनी के कर्मचारियों से आवश्यक अनुमति और दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद एसडीएम अभिषेक सिंह ने तत्काल प्रभाव से कार्य बंद कराने के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि आवश्यक अनुमति प्रस्तुत किए बिना किसी भी प्रकार की गतिविधि नहीं होगी।
बताया गया कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले जमतरा स्थित इस पुल को कबाड़ घोषित कर नीलाम किया गया था। कंपनी को केवल लोहे को हटाने का कार्य सौंपा गया था, लेकिन उसने नियमों के विपरीत जाकर नदी की धारा को बाधित करते हुए सड़क निर्माण कर दिया, जिससे न केवल नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ बल्कि जलस्तर में भी वृद्धि देखी गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, हाल ही में एक युवक की डूबने से हुई मौत के पीछे भी इस अवैध सड़क निर्माण को एक कारण माना जा रहा है, क्योंकि पानी का स्तर अचानक बढ़ गया था। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि जिस स्थान पर पहले कमर तक पानी रहता था, वहां अब गहराई बढ़ गई है।
प्रशासन ने कंपनी से यह भी कहा है कि वह लिखित अंडरटेकिंग दे कि कार्य पूर्ण होने के बाद नदी में बनाई गई सड़क को हटाया जाएगा। साथ ही विशेषज्ञों का सुझाव है कि कंपनी से भारी सुरक्षा राशि जमा कराई जाए, ताकि यदि वह नियमों का पालन न करे तो उससे पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई की जा सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नदी की अविरल धारा को पुनः कैसे बहाल किया जाएगा और इस अवैध निर्माण को हटाने की प्रक्रिया कब और कैसे पूरी होगी। यह मामला न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।


