कहते हैं, जब हौसला और सही इलाज साथ हों तो सबसे कठिन लड़ाई भी जीती जा सकती है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण जिला चिकित्सालय बालाघाट के एसएनसीयू (विशेष नवजात देखभाल इकाई) में देखने को मिला, जहां महज 880 ग्राम वजन के एक नवजात शिशु ने 60 दिनों की कठिन जंग लड़कर जिंदगी की नई शुरुआत की।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप ने बताया कि वार्ड नंबर 11, मोहगांव (पोस्ट चांगोटोला, तहसील लामता) निवासी सुमन्द्री उइके ने 24 फरवरी 2026 को दोपहर 3:39 बजे पीएचसी मोहगांव में एक बालक को जन्म दिया। शिशु का जन्म समय से पहले (28 सप्ताह) और बेहद कम वजन (लगभग 800 ग्राम) के साथ हुआ, जिससे उसकी हालत बेहद नाजुक थी। स्थिति गंभीर होने पर नवजात को तुरंत जिला चिकित्सालय बालाघाट के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया। सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ के चलते शिशु को प्रोटोकॉल के तहत 11 दिनों तक वेंटिलेशन सपोर्ट (मशीन) पर रखा गया। साथ ही 5 दिनों तक एंटीबायोटिक दवाओं का उपचार भी दिया गया।
डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी में शिशु को शुरुआत से ही मां का दूध नली के माध्यम से दिया गया। धीरे-धीरे हालत में सुधार आने पर उसे कटोरी-चम्मच से दूध पिलाना शुरू किया गया। नियमित जांच, देखभाल और विशेष उपचार के चलते शिशु की स्थिति में लगातार सुधार होता गया। करीब 60 दिनों की कड़ी निगरानी और उपचार के बाद, 23 अप्रैल 2026 को जब शिशु का वजन बढ़कर 1500 ग्राम हो गया और वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया, तब उसे सफलतापूर्वक डिस्चार्ज कर दिया गया।
इस सफलता के पीछे एसएनसीयू के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की अथक मेहनत और समर्पण रहा। बच्चे के स्वस्थ होकर घर लौटने पर माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने भावुक होकर पूरे मेडिकल स्टाफ का आभार व्यक्त किया।


