शासकीय कार्यो के साथ पंचायत कार्य और प्रधानमंत्री आवास के हितग्राही तक हो रहे परेशान
वारासिवनी……ग्रामीण क्षेत्र मे विभिन्न निर्माण कार्यो मे भी रेत की दिक्कत को लेकर सोशल मिडिया मे एक पोस्ट को देखकर पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल ने गंभीरता दिखायी है। उन्होने जिलाधीश के समक्ष जनता की परेशानीयो को सामने रखकर त्वरित मे निदान की उम्मीद भी रखी है। दूसरी ओर जिलाधीश ने इस विषया को जिला खनिज अधिकारी के समक्ष रखकर समाधान के निर्देश भी प्रदान किये है। देखना है की अब इस ज्वलंत विषय पर क्या और कब समाधान सामने आता है।
वारासिवनी क्षेत्र मे बडी नदियो और घाटो के होने के बाद भी रेत को लेकर चौतरफा दिक्कते देखी जा रही है। मंत्रालय भोपाल के द्वारा करायी गयी घाटो की निविदा के अभी तक बालाघाट जिले मे पूर्ण नही होने के कारण रेत अब एक सपना बनकर रह गयी है। मप्र शासन ने रेत की निविदा एक नही दो बार लगा दी है किंतू आफसेट प्राईज अधिक होने की दुहाई देकर विभिन्न ठेकेदारो ने अभी तक रूची नही दिखायी है। जिसके कारण वर्तमान मे सभी रेत घाटो मे रेत का उत्खनन पूर्णतह प्रतिबंधित है और जनता के साथ अनेको शासकीय ठेकेदार भी विभिन्न निर्माण कार्यो को लेकर परेशान है की आखिर रेत की पूर्ति करे तो कंहा से करे।
इस विषय को सोशल मिडिया मे कुंजबिहारी मुन्नू दुबे ( जिलाध्यक्ष ) कृषक भारतीय संगठन बालाघाट ने भी सामने रखकर जनप्रतिनिधीयो से उम्मीद जतायी है की आज जिले का प्रत्येक व्यक्ति रेत को लेकर परेशान है । हमारे जिले मे भवन निर्माण का कार्य फरवरी से लेकर 15 जून तक ही होता है। इसके उपरांत किसान भाई व मजदूर भाई खेती के कार्य मे व्यस्त हो जाता है। ऐसी स्तिथि मे अगर उपभोक्ता को रेत ना मिले तो वह किसी भी प्रकार का कच्चा अथवा पक्का निर्माण कार्य कैसे करवा सकता है।
इसी तरह की पीडा बडे बडेे शासकीय कार्य व पंचायत निर्माण कार्यो के साथ प्रधानमंत्री आवास हितग्राहीयो की भी है की अगर समय सीमा मे निर्माण कार्य पूर्ण नही होगे तो जून माह से नदियो मे पानी का बहाव भी रेत की निकासी को प्रभावित करेगा। तब उनके निर्माण कार्यो का क्या होगा। साथ ही करोडो रूपये की राशी भी प्रभावित हो जायेगी। दूसरी ओर शासकीय ठेकेदार भी निर्माण कार्य की समयसीमा के खत्म होने की ओर इशारा कर रहे है कि अगर रेत नही मिली तो उनको मिली समयसीमा का क्या होगा?
जनमानस की इस समस्या की गंभीरता को समझकर पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल ने तत्काल इस विषय को जिलाधीश के समक्ष रखकर समाधान की उम्मीद जतायी है। विशेषकर शासकीय कार्य, ग्राम पंचायतो के कार्य और प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहीयो के निर्माण कार्य की तकलीफो को खुलकर प्रशासन के समक्ष रखा गया है। दूसरी ओर सुत्रो के अनुसार अधिकारी वर्ग द्वारा पडोसी जिले सिवनी से रेत लाकर निर्माण कार्य की दिक्कते दूर कर लेने की बाते भी सामने आयी है की किंतू निर्माणकर्ताओ का स्पष्ट कथन सामने आया है की क्या 90 किमी दूर सिवनी से रेत लाना व्यावहारिक है और इतनी दूर का आवागमन का भाडा उठा पाना संभव है।


