34.9 C
Jabalpur
June 22, 2026
सी टाइम्स
सी टाइम्सsampadkiya

जन कल्याण का रास्ता टिकाऊ नहीं

भारत में जन कल्याण का जो रास्ता चुना गया है, वह टिकाऊ नहीं है। हर वर्ष पिछले साल की तुलना में औसतन अधिक कर्ज लेने के बावजूद सरकारें नकदी हस्तातंरण की योजनाओं को सुगमता से नहीं चला पा रही हैं।
बृहत-मुंबई महानगर पालिका के रिटायर शिक्षक का पेंशन भुगतान ना होने के बचाव में सरकार ने खजाने में पैसा ना होने का तर्क दिया। तो उससे नाराज बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के पास अपने रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए पैसा नहीं है, तो उसे लड़की बहन योजना रोक देनी चाहिए। इस योजना के तहत राज्य की डेढ़ करोड़ महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये दिए जाते हैं। खुद राज्य के मंत्री ऐसे बयान दे चुके हैं कि इस योजना से राजकोष पर पड़े भारी बोझ के कारण तमाम विभागों के बजट प्रभावित हुए हैँ। इस बीच हरियाणा में अस्पतालों के संघ ने संबंधित अधिकारी को पत्र लिख कर कहा है कि 20 अप्रैल तक उनके बकाये का भुगतान नहीं हुआ, तो वे आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को भर्ती करना बंद कर देंगे।
पत्र में ध्यान दिलाया गया है कि अस्पतालों का 400 करोड़ रुपये से अधिक बकाया सरकार पर है। आयुष्मान भारत के बारे में ऐसी शिकायतें कई अन्य राज्यों से भी आई हैं। ये खबरें बताती हैं कि भारत में जन कल्याण का जो रास्ता चुना गया है, वह टिकाऊ नहीं है। हर वर्ष पिछले साल की तुलना में औसतन अधिक कर्ज लेने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारें नकदी हस्तातंरण की योजनाओं को सुगमता से नहीं चला पा रही हैं। और ऐसा होना अस्वाभाविक नहीं है। यह मूलभूत सिद्धांत है कि कोई अर्थव्यवस्था उत्पादक निवेश और पूंजी निर्माण पर टिकी नहीं है, तो वह उपभोग उन्मुख जन कल्याण को सुनिश्चित नहीं कर सकती।
ऋण लेना अपने आप में समस्या नहीं है, बशर्ते उसका उपयोग उत्पादन बढ़ाने या टिकाऊ संपत्ति खड़ी करने में हो रहा हो। इन दोनों प्रक्रियाओं से मांग पैदा होती है, जिससे स्वत: उपभोग बढ़ता है। इस क्रम में सरकार का कर राजस्व बढ़ता है, जिससे वह टिकाऊ जन- कल्याण योजनाओं को चलाने की बेहतर स्थिति में होती है। मगर अपने यहां उलटी राह चुनी गई है। इस बीच चुनावी राजनीति में वोट खरीदने की बढ़ी प्रवृत्ति ने स्थिति ओर बिगाड़ दी है। उसका परिणाम महाराष्ट्र और हरियाणा जैसी स्थितियां हैं।

 

अन्य ख़बरें

गाड़ी पांच मिनट में उठती है, कचरा पांच दिन में क्यों नहीं?

Newsdesk

जबलपुर के सार्वजनिक शौचालय: जहां टैक्स जनता देती है, और राज कीड़े-मकोड़ों का चलता है

Newsdesk

बढ़ती विषमता का आईना

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading