July 27, 2026
सी टाइम्स
क्राइमप्रादेशिक

भाजपा नेताओं ने चंद्रनाथ रथ की हत्या को बताया राज्य सरकार की साजिश, पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग

कोलकाता, 7 मई । पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक तनाव और हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की हत्या ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा नेताओं ने इस घटना को राजनीतिक साजिश बताते हुए राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।

खड़गपुर सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विजयी उम्मीदवार दिलीप घोष ने न्यूटाउन में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि हिंसा और गोलीबारी की घटनाएं रुक जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग चुनाव के दौरान अपना प्रभाव नहीं दिखा पाए, वे अब हिंसा का सहारा ले रहे हैं। दिलीप घोष ने पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि असामाजिक तत्वों को तुरंत रोका जाना चाहिए।

दिलीप घोष ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक पर हमला बेहद गंभीर मामला है और राज्य में हो रही घटनाओं को तत्काल रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में आ चुकी है, लेकिन अभी औपचारिक रूप से सरकार का गठन नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के गुटीय संघर्ष का असर भाजपा कार्यकर्ताओं पर पड़ रहा है और उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

भाजपा नेता दिलीप हलदर ने चंद्रनाथ रथ की हत्या को “राजनीतिक मकसद से की गई टारगेटेड हत्या” बताया। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम और भवानीपुर में चंद्रनाथ रथ ने चुनाव के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई थी और यही कारण है कि उन्हें निशाना बनाया गया। हलदर ने दावा किया कि हत्या पूरी योजना के तहत की गई, क्योंकि एक भी गोली अपने निशाने से नहीं चूकी। सुवेंदु अधिकारी इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और कानून के अनुसार कार्रवाई कराई जाएगी।

सुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (पीए) चंद्रनाथ रथ के एक पड़ोसी ने बताया, “रात 10.30 बजे जब मैंने टीवी चालू किया तो मैंने देखा कि टीवी पर ‘दादा’ की तस्वीर दिखाई जा रही थी और उन्हें तीन गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। हम पूरी तरह टूट गए। घर में मौजूद लोग रोने लगे। पड़ोसी दौड़ते हुए हमारे पास आए। कुछ पड़ोसी तो उस समय अपनी कारों से कोलकाता के लिए निकल भी चुके थे। हम तो कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि हमारे साथ ऐसी कोई दुर्घटना हो सकती है।”

 

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