May 6, 2026
सी टाइम्स
हेल्थ एंड साइंस

छोटे-छोटे बदलाव से मजबूत होगी मेंटल हेल्थ, एक्सपर्ट्स ने बताए आसान उपाय



नई दिल्ली, 5 मई। आज की भागदौड़ भरी और अनियमित दिनचर्या का नकारात्मक असर न केवल तन बल्कि मन पर भी पड़ता है। लिहाजा, तनाव, चिड़चिड़ापन, छोटी-छोटी बात पर गुस्सा के साथ ही मूड स्विंग, अनिद्रा, बैचेनी, अकेलापन व हताशा आम सी बात बन गई है। ऐसे में एक्सपर्ट बताते हैं कि दिनचर्या में छोटे बदलाव करके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर किया जा सकता है। 

एनएचएम के विशेषज्ञों का कहना है कि इन आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव दिखने लगते हैं। व्यस्त दिनचर्या में भी 30-40 मिनट खुद के लिए निकालना संभव है। मानसिक स्वास्थ्य कोई बड़ी समस्या नहीं है, बल्कि छोटी-छोटी सकारात्मक आदतों का परिणाम है। अगर हम वर्क-लाइफ बैलेंस बनाएं, सेल्फ केयर पर ध्यान दें, परिवार के साथ समय बिताएं और नियमित व्यायाम-योग करें तो न सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होगा, बल्कि जीवन की समग्र गुणवत्ता भी बढ़ेगी।

नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अनुसार, दैनिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव अपनाकर मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और भावनात्मक मजबूती को आसानी से बेहतर बनाया जा सकता है। साइकोलॉजिस्ट डॉ. गरिमा सिंह ने मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत रखने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।

डॉ. गरिमा बताती हैं कि आजकल के व्यस्त जीवन में लोग एक तरफा होकर रह जाते हैं। किशोरावस्था (एडोलसेंट स्टेज) में बच्चे पढ़ाई पर पूरा ध्यान देते हैं। करियर बनाने की चिंता में वे खेल-कूद, गेम्स या दोस्तों के साथ समय बिताना भूल जाते हैं। इसी तरह वयस्कता में लोग अपनी प्रोफेशनल जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि परिवार और व्यक्तिगत जीवन की उपेक्षा कर बैठते हैं। इसी समस्या का समाधान है वर्क-लाइफ बैलेंस बनाना। एडोलसेंट स्टेज में पढ़ाई के साथ-साथ खेल, शौक और सामाजिक गतिविधियों के लिए भी समय निकालना चाहिए।

वहीं, वयस्कों को नौकरी या बिजनेस के साथ परिवार, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत समय का संतुलन बनाना आवश्यक है। उदाहरण के तौर पर अगर सुबह 9 से शाम 5 बजे तक ऑफिस है तो घर पहुंचने के बाद ऑफिस की चिंताओं को छोड़कर परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य सुधारने का दूसरा महत्वपूर्ण तरीका सेल्फ केयर है। रोजाना कुछ समय खुद के लिए निकालें। इसमें अपनी पसंदीदा हॉबीज जैसे पढ़ना, संगीत सुनना, पेंटिंग या गार्डनिंग शामिल हो सकती हैं। परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताना भी खुशी बढ़ाता है। शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। रोजाना व्यायाम, योगासन या ध्यान (मेडिटेशन) करना फायदेमंद साबित होता है। ये छोटी-छोटी आदतें तनाव कम करती हैं, ऊर्जा बढ़ाती हैं और मन को शांत रखती हैं।

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