जबलपुर। बरगी बांध क्रूज हादसे के बाद घायलों के साथ संवेदनहीनता बरतना एक निजी अस्पताल को महंगा पड़ गया। जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए गौर तिराहा स्थित नोबल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल का लाइसेंस एक माह के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, हादसे में बचाई गई एक महिला, सविता शर्मा को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें सिर्फ दर्द निवारक और टिटनस का इंजेक्शन देने के बाद 4,700 रुपये का बिल थमा दिया। आपदा की स्थिति में भी परिजनों से यह राशि वसूल ली गई, जिसकी शिकायत सामने आने पर प्रशासन हरकत में आया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जांच के निर्देश दिए। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने बताया कि आपदा की स्थिति में घायलों को निशुल्क प्राथमिक उपचार देना अनिवार्य होता है। अस्पताल द्वारा किया गया यह कृत्य आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 का स्पष्ट उल्लंघन है।
कार्रवाई के तहत अस्पताल का लाइसेंस एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है और इस अवधि में नए मरीजों को भर्ती करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। साथ ही अस्पताल को निर्देश दिया गया है कि वर्तमान में भर्ती मरीजों का समुचित इलाज कर उन्हें नियमानुसार डिस्चार्ज किया जाए। प्रबंधन को 7 दिनों के भीतर कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए भी कहा गया है, अन्यथा लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त किया जा सकता है।
प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित कराया कि पीड़ित महिला से वसूली गई राशि वापस की जाए। इस कार्रवाई के जरिए प्रशासन ने शहर के अन्य निजी अस्पतालों को कड़ा संदेश दिया है कि आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही या अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


