May 9, 2026
सी टाइम्स
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5 राज्यों में कुल कितने मुस्लिम कैंडिडेट्स चुनाव जीते

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने हर तरफ चौंकाने वाली राजनीतिक तस्वीर बना दी है. एक ओर जहां बीजेपी ने पश्चिम बंगाल और असम में जोरदार वापसी करते हुए सरकार बनाई, वहीं दूसरी ओर केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने एक दशक बाद सत्ता में वापसी की. इस पूरे चुनावी घमासान के बीच मुस्लिम उम्मीदवारों का प्रदर्शन एक अहम सवाल बना रहा. भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के मुताबिक, इन पांच राज्यों की कुल 824 विधानसभा सीटों में से 107 पर मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है, लेकिन बीजेपी के खाते में एक भी मुस्लिम विधायक नहीं है.

294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में इस बार 40 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. हालांकि, 2021 के चुनाव में यह संख्या 44 थी, यानी TMC के मुस्लिम विधायकों की तादाद 43 से घटकर 34 रह गई है. वहीं गैर-TMC और गैर-बीजेपी मुस्लिम विधायकों की संख्या 1 से बढ़कर 6 हो गई है. इनमें कांग्रेस के दो, आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के दो, माकपा का एक और ISF का एक विधायक शामिल है. बीजेपी ने इस बार एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया था, जिसका सीधा फायदा विपक्षी दलों को मिला.

140 सीटों वाली केरल विधानसभा में 35 मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, जो कुल विधायकों का 25 प्रतिशत है. 35 विधायकों में 30 मुस्लिम विधायक सत्ताधारी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के हैं, जिसमें कांग्रेस के 8 और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के 22 विधायक सामिल हैं. विपक्षी माकपा के चार और भाकपा के एक मुस्लिम विधायक भी चुनकर आए हैं. केरल में मुस्लिम विधायकों की संख्या में पिछली बार की तुलना में तीन सीटों का इजाफा हुआ है, जो UDF की मजबूत पकड़ को दर्शाता है.

असम की 126 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में 22 मुस्लिम उम्मीदवार विधायक बने हैं. पिछली विधानसभा में यह आंकड़ा 31 था, यानी इस बार 9 सीटों की गिरावट दर्ज की गई है. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कांग्रेस के कुल 19 विधायकों में से 18 मुस्लिम समुदाय से हैं. इसके अलावा ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के दो, रायजर दल का एक और तृणमूल कांग्रेस का एक मुस्लिम विधायक विधानसभा पहुंचा है. पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे राज्य के बदले राजनीतिक समीकरण और परिसीमन को बड़ी वजह माना जा रहा है.

234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में इस बार 9 मुस्लिम उम्मीदवारों को जीत मिली है. इनमें DMK के तीन, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के दो, कांग्रेस का एक और विजय थलापति की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के तीन मुस्लिम विधायक शामिल हैं. राज्य की 5.86 प्रतिशत मुस्लिम आबादी के मुकाबले विधानसभा में इनकी हिस्सेदारी करीब 3 प्रतिशत है, जो बेहद कम है.

केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 सदस्यीय विधानसभा में इस बार एक ही मुस्लिम उम्मीदवार जीत दर्ज कर पाया है. DMK के उम्मीदवार ए.एम.एच. नजीम इकलौते मुस्लिम विधायक बने हैं. उन्होंने कराईकल साउथ सीट से जीत हासिल की है. 6.05 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले इस प्रदेश में यह स्थिति राजनीतिक दलों के मुस्लिम उम्मीदवारों को प्रतिनिधित्व न दिए जाने का नतीजा मानी जा रही है.

 

राज्य कुल सीटें मुस्लिम विधायक
पश्चिम बंगाल 294 40
केरल 140 35
असम 126 22
तमिलनाडु 234 9
पुडुचेरी 30 1
कुल 824 107

पांचों राज्यों को मिलाकर 107 मुस्लिम विधायक चुने गए हैं, जो कुल 824 (वर्तमान घोषित) विधायकों का करीब 14.40 प्रतिशत है. हालांकि, इनमें से एक भी बीजेपी का उम्मीदवार नहीं है क्योंकि पार्टी ने किसी भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था. केरल और असम में मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत दर 80 प्रतिशत से ज्यादा रही, जबकि तमिलनाडु और पुडुचेरी में मुस्लिम प्रतिनिधित्व बेहद कमजोर रहा. यह आंकड़े बताते हैं कि मुस्लिम मतदाताओं ने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग रुख अपनाया, लेकिन राजनीतिक दलों से उन्हें उम्मीदवारी मिलने में अब भी बड़ा फासला नजर आता है.

 

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