*
बालाघाट। जिले की राजनीति में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची हुई है। कांग्रेस संगठन के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि जिले के 2 कांग्रेस विधायक जल्द ही भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह बालाघाट की राजनीति में बड़ा भूचाल साबित हो सकता है।
*सूत्रों के मुताबिक, जिला कांग्रेस कमेटी पर कुछ विधायकों का पूरा नियंत्रण हो गया है*। मंडल, ब्लॉक और बूथ स्तर तक संगठन को अपने हिसाब से ढाला जा रहा है। आरोप यह भी है कि इस पूरी प्रक्रिया में वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित वरिष्ठ और कर्मठ कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया है, जिससे जमीनी स्तर पर भारी नाराजगी पनप रही है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष संजय uike की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि वे विधायकों के प्रभाव में आकर संगठन को संतुलित तरीके से नहीं चला पा रहे हैं। नतीजा यह हुआ कि पार्टी के भीतर गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है और संगठन लगातार कमजोर होता जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर चुनाव से महज 6 महीने पहले विधायकों का दल बदल होता है, तो कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका होगा। इससे न केवल संगठन का मनोबल गिरेगा, बल्कि कार्यकर्ताओं में भी भ्रम और असंतोष बढ़ेगा, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है।
वहीं, कांग्रेस हाईकमान की भूमिका अब बेहद अहम हो गई है। यदि समय रहते संगठन में बदलाव और असंतुष्ट नेताओं को साधने के प्रयास नहीं किए गए, तो बालाघाट में कांग्रेस का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
फिलहाल, पूरे जिले की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ये अटकलें हकीकत बनेंगी या कांग्रेस समय रहते हालात को संभाल पाएगी। आने वाले दिन बालाघाट की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।


