आरटीआई में खर्च का रिकॉर्ड नहीं, नगर निगम की बहुचर्चित योजना अब विवादों में
जबलपुर। नगर निगम जबलपुर की चर्चित ‘कबाड़ से कमाल’ योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। पुरानी और अनुपयोगी बसों को रैन बसेरा, पुस्तक बैंक, थैला बैंक और बर्तन बैंक जैसे सामाजिक उपयोगों में बदलने की इस पहल को कभी नवाचार और संसाधनों के बेहतर उपयोग का उदाहरण बताया गया था। शहर में इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया गया, लेकिन अब इसकी पारदर्शिता को लेकर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिन पुरानी बसों को इस योजना के तहत उपयोग में लाया गया था, उनमें से कई अब दिखाई नहीं दे रही हैं, जबकि कुछ की हालत बेहद खराब बताई जा रही है। ऐसे में शहरवासियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इन बसों का क्या हुआ। लोगों का सवाल है कि क्या इन्हें कबाड़ के रूप में बेच दिया गया या फिर इनके उपयोग और निपटान के पीछे कोई अन्य आर्थिक गतिविधि हुई है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी में नगर निगम द्वारा इस योजना पर किसी प्रकार के खर्च से इनकार किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद नागरिकों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि यदि योजना पर कोई राशि खर्च नहीं हुई, तो बसों का रूपांतरण किस प्रकार किया गया। यदि कार्य हुआ, तो उसका तकनीकी और वित्तीय रिकॉर्ड कहां है।
शहर के सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि योजना के नाम पर लाखों रुपये के नवाचार और सार्वजनिक उपयोग की बात कही गई थी, इसलिए अब निगम को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन बसों की वर्तमान स्थिति क्या है। यदि बसों को कबाड़ में बेचा गया है, तो उसकी प्रक्रिया और दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही यह भी बताया जाए कि किसी आर्थिक लेन-देन से किसे लाभ हुआ।
लोगों का कहना है कि यह केवल बसों का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति और प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न है। ऐसे में यह तय होना जरूरी है कि योजना की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी किन अधिकारियों के पास थी तथा पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही।
अब शहर में यह चर्चा भी होने लगी है कि ‘कबाड़ से कमाल’ वास्तव में सामाजिक उपयोग की अभिनव पहल थी या केवल प्रचार तक सीमित परियोजना। नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
फिलहाल नगर निगम की ओर से इस पूरे मामले पर विस्तृत और स्पष्ट जवाब का इंतजार किया जा रहा है।


