नोएडा, 13 मई । नोएडा में 13 अप्रैल को हुए हिंसक श्रमिक प्रदर्शन मामले में पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस की जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों की भूमिका प्रदर्शन को हिंसक बनाने, भीड़ को भड़काने और अराजकता फैलाने में अहम रही। इस कार्रवाई के बाद जिले में कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन और अधिक सतर्क हो गया है।
पुलिस के अनुसार, जिन दो आरोपियों पर एनएसए लगाया गया है उनमें सत्यम वर्मा और आकृति शामिल हैं। दोनों को मजदूर बिगुल दस्ता का सक्रिय सदस्य बताया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि श्रमिक आंदोलन के दौरान इन दोनों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया था। इतना ही नहीं, प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका पाई गई है।
पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर की ओर से जारी बयान में कहा गया कि श्रमिक धरना और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं तथा भड़काऊ गतिविधियों के संबंध में जिले के विभिन्न थानों में कई मुकदमे दर्ज किए गए थे। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि सत्यम वर्मा और आकृति लगातार लोगों को भड़काने और लोक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद दोनों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हिंसक प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, आगजनी की गई और कानून व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास किया गया। इस मामले में कई अन्य संदिग्धों की भी पहचान की गई है और उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही अन्य आरोपियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने साफ किया कि जिले में अराजकता फैलाने, अफवाहें प्रसारित करने और शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस प्रशासन ने कहा कि जनपद में शांति, सुरक्षा और आम जनता की सुविधा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।


