May 15, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

गुजरात में 20,667 करोड़ रुपए की डबल लाइन रेलवे परियोजना को मिली कैबिनेट की मंजूरी



नई दिल्ली, 13 मई  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने बुधवार को अहमदाबाद (सरखेज)-धोलेरा सेमी-हाईस्पीड डबल लाइन रेलवे परियोजना को मंजूरी दे दी। यह भारतीय रेलवे की पहली ऐसी परियोजना होगी, जिसे स्वदेशी तकनीक के जरिए विकसित किया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 20,667 करोड़ रुपए होगी।

कैबिनेट के बयान के अनुसार, यह रेलवे परियोजना अहमदाबाद, धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (एसआईआर), आगामी धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स (एनएचएमसी) के बीच तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

अहमदाबाद और धोलेरा के बीच यह नई रेल लाइन यात्रियों के सफर का समय कम करेगी, जिससे लोग आरामदायक दैनिक यात्रा और एक ही दिन में आने-जाने की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। यह सेमी-हाईस्पीड रेलवे न केवल दोनों शहरों को करीब लाएगी, बल्कि सैकड़ों किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों को भी फायदा पहुंचाएगी।

सरकार ने कहा कि यह परियोजना देश भर में चरणबद्ध तरीके से सेमी-हाईस्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए एक मॉडल परियोजना के रूप में काम करेगी।

गुजरात के अहमदाबाद जिले में बनने वाली इस परियोजना से भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 134 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। प्रस्तावित रेल लाइन से लगभग 284 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जहां करीब 5 लाख लोग रहते हैं।

नई रेल लाइन से सीधी कनेक्टिविटी और आवाजाही में सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की कार्यक्षमता और सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। बयान में कहा गया कि यह परियोजना प्रधानमंत्री मोदी के ‘न्यू इंडिया’ विजन के अनुरूप है, जो क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के जरिए आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद करेगी।

यह परियोजना पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई है, जिसमें मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वित योजना बनाई गई है।

सरकार के अनुसार, यह परियोजना लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही को सुगम बनाएगी। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद करेगा।

इस परियोजना से तेल आयात में लगभग 0.48 करोड़ लीटर की कमी आएगी और करीब 2 करोड़ किलोग्राम सीओ2 उत्सर्जन कम होगा। यह प्रभाव लगभग 10 लाख पेड़ लगाने के बराबर माना गया है।

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