बिजुरी /ताक पर सड़क सुरक्षा के नियम….
कोयला ढोने वाले ओवरलोड वाहनों के कारण सड़कों को भारी नुकसान पहुंचता है और सड़क दुर्घटनाओं, धूल-प्रदूषण व जाम का खतरा बढ़ता है। नियम के अनुसार वाहन की क्षमता से अधिक भार लादना गैर-कानूनी है। ओवरलोडिंग से जुड़ी प्रमुख समस्याएंसड़कों की बर्बादी: क्षमता से अधिक वजन होने के कारण हाइवा जैसा भारी वाहन मुख्य सड़कों के साथ-साथ ग्रामीण मार्गों को भी तेजी से क्षतिग्रस्त कर देते हैं।। सड़क दुर्घटनाएं—ओवरलोड वाहनों के पलटने या कोयला गिरने से जान-माल के नुकसान का खतरा रहता है। प्रदूषण और धूल–निर्धारित सीमा से अधिक कोयला लदा होने के कारण कोयले का चूर्ण सड़क पर बिखरता है, जिससे गंभीर वायु प्रदूषण फैलता।
कोल परिवहन में सड़क सुरक्षा के नियमों को नजर अंदाज किया जा रहा है।बहेरा बांध खदान से कोयला लेकर वाहन ओवर लोड स्थिति में निकल रहे हैं। खदान में तैनात कर्मियों एवम प्रबंधन व कोल ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत से चल रहे नियम विरूद्ध ओवर लोड वाहन एक ओर जहां सड़क का दम निकाल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।
सूत्रों की माने तो इस मिलीभगत की शिकायत कलेक्टर तक पहुंची गई है। यही वजह है कि इस ओवर लोड कोल वाहनों पर भी जांच व कार्रवाई शुरू की जाएगी। कोल परिवहन में लगे वाहनों के ओवरलोड होने के पीछे तौल में गोलमाल माना जा रहा है। शिकायत में अवगत कराया गया है कि तौल कांटों पर गड़बड़ी कर वाहनों से निर्धारित मानक से अधिक कोयले का परिवहन किया जा रहा है।
हाइवा वाहन में उनकी ट्राली की क्षमता के अनुरूप में कोयले का परिवहन किया जाना निर्धारित किया गया है, लेकिन ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत से न केवल अधिक मात्रा में कोयले का परिवहन किया जा रहा है। बल्कि नियमों को ताक पर रखकर सड़कों को क्षति पहुंचाया जा रहा है। यह सब जिम्मेदारों की जानकारी में हो रहा है।
कुछ महीनों में ही बिगड़ जाती है सड़क की सूरत–
कोल वाहनों का क्षमता से अधिक कोयला लोड करने का नतीजा यह है कि चंद दिनों में ही सड़क की सूरत बदल जाती है। खासतौर पर बिजुरी से राजनगर के लिए जाने वाली सड़क का साल भर पहले ही मरम्मत किया गया था, लेकिन वह फिर से मरम्मत की स्थिति में पहुंच गया है। कुछ ऐसा ही हाल अन्य दूसरे मार्ग का भी है।


