देवानंद नांदने की शिकायत से खुला भ्रष्टाचार का काला खेल
लखनादौन (सिवनी)।
जनपद पंचायत लखनादौन में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का सनसनीखेज खुलासा होने से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। सरकारी योजनाओं के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई को किस तरह कागजों में गायब किया गया, इसका पर्दाफाश तब हुआ जब संवाददाता देवानंद नांदने ने केसबुक और ऑनलाइन पोर्टल के आंकड़ों का मिलान कर गंभीर अनियमितताओं की लिखित शिकायत प्रशासन को सौंपी।
शिकायत के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर एवं जिला पंचायत सी ई ओ के निर्देश पर गठित जिला स्तरीय जांच दल ने जो रिपोर्ट सौंपी, उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी।
*जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे*
▶ 104 वाउचर गायब
जांच के दौरान रिकॉर्ड से कुल 104 वाउचर गायब पाए गए, जिनकी राशि लगभग ₹41,41,483 बताई गई है। इतने बड़े पैमाने पर दस्तावेजों का गायब होना सीधे-सीधे वित्तीय हेराफेरी की ओर इशारा करता है।
▶ ऑनलाइन रिकॉर्ड और भुगतान में बड़ा अंतर
12 वाउचर में पोर्टल पर दर्ज राशि और वास्तविक भुगतान में ₹1,07,760 का अंतर पाया गया। इससे स्पष्ट है कि सरकारी खातों में हेरफेर कर राशि निकालने का खेल लंबे समय से चल रहा था।
▶ ₹1.10 करोड़ से ज्यादा का संदिग्ध लेन-देन
पहले से ही ₹1.10 करोड़ से अधिक की संदिग्ध वित्तीय गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ चुकी थीं। जांच में कई तथ्यों की पुष्टि होने के बाद अब यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि संगठित भ्रष्टाचार माना जा रहा है।
*भ्रष्टाचार पर पहली बड़ी कार्रवाई — सहायक लेखापाल निलंबित*
जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता और गंभीर लापरवाही प्रमाणित होने पर
कार्यालयीन आदेश क्र. 0/382/ज.पं./स्था./2026 दिनांक 05.05.2026 के तहत
सहायक लेखापाल श्री संजय तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
यह कार्रवाई मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1999 के तहत की गई है।
*क्या सिर्फ मोहरा फंसा? असली मास्टरमाइंड कौन?*
जनपद में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या करोड़ों के इस खेल में केवल एक लेखापाल ही जिम्मेदार था?
सूत्रों के अनुसार, जांच की आंच कई बड़े अधिकारियों तक पहुंच रही थी। इसी बीच कुछ अधिकारियों के अचानक तबादले किए जाने से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कहीं बड़े चेहरों को बचाने के लिए कार्रवाई सीमित तो नहीं की जा रही?
*जनता पूछ रही है…*
– आखिर 104 वाउचर गायब कैसे हुए?
– करोड़ों का भुगतान किसके आदेश पर हुआ?
– क्या जांच बड़े अधिकारियों तक पहुंचेगी?
– क्या ट्रांसफर भ्रष्टाचार छिपाने की रणनीति है?
अब पूरा क्षेत्र प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर टिकाए बैठा है।
*मुख्य बिंदु*
✅ शिकायतकर्ता – देवानंद नांदने (संवाददाता)
✅ कुल संदिग्ध राशि – ₹1.10 करोड़ से अधिक
✅ 104 वाउचर गायब
✅ भुगतान में गड़बड़ी प्रमाणित
✅ सहायक लेखापाल संजय तिवारी निलंबित
✅ बड़े अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
✅ ट्रांसफर के पीछे बचाव की आशंका
*जनता के पैसों पर डाका डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा क्षेत्र में बढ़ा जनाक्रोश*
लखनादौन जनपद का यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन चुका है। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। जनता अब सिर्फ निलंबन नहीं, बल्कि एफआईआर, रिकवरी और जेल की कार्रवाई की मांग कर रही है।


