अनूपपुर. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक के कुछ प्रोफेसर टेंडर, खरीदारी और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में करोड़ों रुपए का गबन और भ्रष्टाचार किए हैं और उस भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए जातिवाद का जहर सोशल मीडिया के माध्यम से देश और समाज में फैला कर समाज के विरुद्ध संगठित अपराध कर रहे है, इस अपराध के पीछे टेंडर और परचेज कमेटी के सदस्य के साथ-साथ विश्वविद्यालय के कई अधिष्ठाता, हेड ऑफ डिपार्टमेंट तथा अनुशासन समिति के सदस्य शामिल हैं. विश्वविद्यालय में अस्थिरता लाने, कम्युनिस्ट तथा प्रतिबंधित संगठनों का विश्वविद्यालय में अड्डा बनवाने तथा विश्वविद्यालय को बदनाम करने के लिए कुछ प्रोफेसरों ने कुछ छात्रों को जातिवाद, क्षेत्रवाद और फर्जी आंदोलन का टूल बना लिए हैं. परीक्षा के दौरान अनधिकृत प्रवेश, धमकी, परीक्षा कार्य में बाधा डालने एवं अनुशासनहीनता संबंधी मामले में कार्यवाही बाबत वोकेशनल विभाग के शिक्षक डॉ कमलेश पांडेय, रंजन कुमार तथा शोध विद्वान एवं अनुसूचित जाती युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष आयन ब्रम्हा ने इसकी लिखित शिकायत विश्वविद्यालय के कुलपति तथा कुलसचिव से की है ।
शिक्षको द्वारा शिकायत के अनुसार दिनांक 20 मई 2026 को सुबह 10 बजे के लगभग बी.वोक. सिक्स सेमेस्टर के लिए आयोजित परीक्षाओं के दौरान नारद भवन में एक गंभीर अनुशासनहीनता, धमकी, भयादोहन, अनुशासनहीनता एवं दुराचार की घटना घटित हुई है, वास्कोडिगामा ने बिना किसी पूर्व अनुमति के जबरन परीक्षा कक्ष में प्रवेश किया। जो परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए युजीसी के नियम से पात्र नहीं था, क्योंकि उसने नियमित कक्षाओं में उपस्थिति नहीं दी थी उसका अटेंडेंस शून्य है तथा विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार आवश्यक आंतरिक परीक्षाओं में भी सम्मिलित नहीं हुआ था, जिसके कारण परीक्षा विभाग से उसका एडमिट कार्ड जारी नहीं हुआ है।
*प्रायोजित आन्दोलन कर जातिवाद एवं क्षेत्रवाद का माहौल बनवाने की धमकी पहले ही दे चूका था*
शिक्षको ने शिकायत में पहले ही बताया था की परीक्षा के दौरान वास्को द्वारा बिना अनुमति परीक्षा कक्ष के अंदर वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। परीक्षा कक्ष में वीडियो रिकॉर्डिंग पूर्णतः प्रतिबंधित है, तब वास्को ने शिक्षकों से अभद्र एवं धमकीपूर्ण व्यवहार किया। वास्को ने चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि उसके “ऊँचे एवं प्रभावशाली लोगों से संपर्क हैं, कई मामलों में फसवा देगा और प्रायोजित आन्दोलन करवा कर जातिवाद एवं क्षेत्रवाद का माहौल बनवा देगा। सभी खतरनाक लोगों और प्रोफेसरों से उसके गहरे संबंध हैं, अंदर बाहर नुकसान पहुँचाने की धमकी दिया है। वास्को का व्यवहार न केवल परीक्षा अनुशासन एवं विश्वविद्यालय नियमों का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि इससे परीक्षा कक्ष का वातावरण भय, अव्यवस्था एवं अशांति से प्रभावित हुआ, जिससे परीक्षा की निष्पक्ष एवं सुचारु प्रक्रिया बाधित हुई और शिक्षक डर गए हैं, शिक्षको ने ऐसी संभावना भी बताई है कि वास्कोडिगामा हमें जान-माल का नुकसान या कोर्ट में झूठा केश करके या प्रायोजित आन्दोलन करके अन्य किसी भी प्रकार से अपूर्णीय क्षति पहुँचा सकता है।
*शिक्षणों ने गंभीरता से जाँच कानूनी प्रक्रिया हेतु जिला प्रशासन को सूचित करने का किया था आग्रह*
शिक्षको ने शिकायत में पहले ही लिखा था की प्रकरण की गंभीरता से जाँच कर तथा संबंधित कानूनी प्रक्रिया एवं सुरक्षा हेतु जिला प्रशासन को सूचित करने तथा संबंधित छात्र के विरुद्ध विश्वविद्यालय के नियमों एवं कानूनी प्रावधानों के अनुसार उचित कार्यवाही करने लिखित शिकायत में प्रस्तुत किया था। विश्वविद्यालय परिसर एक संरक्षित क्षेत्र में आता है तथा प्रोटेक्टेड एरिया होने के नाते उस परिसर के अंदर किसी भी प्रकार का धरना प्रदर्शन आंदोलन के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव का अनुमति होना जरूरी है, अन्यथा की स्थिति में वह अपराध के श्रेणी में आता है.
*विश्वविद्यालय के अंदर भारी असुरक्षा का माहौल*
वास्को द्वारा विवि के प्रशासनिक भवन के अंदर किए जा रहे प्रायोजित जातिगत दिखावा वाले आन्दोलन में विवि परिसर में प्रतिबंधित संगठन पीएफआई तथा एसएफआई के सदस्यों को भी बुलवाया जा रहा है, सवाल यह है कि विश्वविद्यालय में इतनी सुरक्षा होने के बावजूद विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से बाहरी हथियारबंद, प्रतिबंधित संगठन के लोग प्रशासनिक भवन के समक्ष कैसे पहुंच जा रहे हैं? इस आंदोलन को प्रायोजित करने वाले शिक्षक अपनी गाड़ी में मुख्य द्वार से नशे की सामग्री तथा हथियार के साथ ऐसे असामाजिक एवं आपराधिक तत्वों अंदर लाकर जातिवाद का माहौल बनाने संगठित अपराध कर रहे है, जो की विश्वविद्यालय की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा करता है? यह भी सवाल है कि विश्वविद्यालय के कौन-कौन से छात्र बिना अनुमति के प्रशासनिक भवन के समक्ष बाहरी असामाजिक तत्वों को बुलवा रहे हैं और जातिवाद के नाम पर कब्जा करना चाहते हैं.
*सीता मैया के लिए आपत्तिजनक पुस्तक का वितरण और हिंदू देवी देवताओं के खिलाफ सार्वजनिक कार्यक्रम*
पिछले वर्ष 2025 सितंबर में हिंदू देवी देवता और सीता मैया के खिलाफ आपत्तिजनक प्रतिबंधित पुस्तकों का वितरण किया गया, हिंदू धर्म के खिलाफ लक्ष्मण हावानुर हाल में बिना अनुमति कार्यक्रम किया गया. 15 नवंबर जनजातीय गौरव दिवस के दिन जनजातियों को हिंदू नहीं बताने वाला और समाज में नफरत फैलाने वाले बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसकी शिकायत अज्ञात लोगों के नाम पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिदेशक को लिखित में शिकायत किया था, प्रारंभिक जांच में सीसीटीवी फुटेज में वास्को के विरुद्ध साक्ष्य जप्त हुआ लेकिन अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं किया जाना, रिपोर्ट लिखने से रुकवाने के लिए लाखों रुपए का खेल हुआ और मामले को दबा दिया गया है, विश्वविद्यालय के भ्रष्टाचार से हुई कमाई के करोड रुपए ऐसे अपराधों को रोकने के लिए बांटा जाता है, कुछ शिक्षक धर्मांतरण करवाने तथा नशा के कारोबार में करोड़ों रुपए कमाने में लगे हैं, उन शिक्षकों का प्रमुख टूल वास्को है जिसका धर्मांतरण पहले ही कराया जा चुका है, जिसके कारण वास्को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का लाभ नहीं ले सकता है, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार धर्मांतरण पश्चात् कोई भी अनुसूचित जाति का लाभ नहीं ले सकता है. वास्को के द्वारा अभी तक जितने भी धर्मांतरण करवाए गए हैं, इसकी जांच होना भी जरूरी है और प्रशासन की पास इसकी पर्याप्त साक्ष्य है लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है.


