*जनसुनवाई में फूटा गरीब का दर्द, बोला – “मजदूरी की कमाई ले ली, अब नगर पालिका फिर मांग रही टैक्स
अनूपपुर । संजय चौधरी पर एक गरीब मजदूर परिवार से धोखाधड़ी और विश्वासघात का गंभीर आरोप लगा है। मामला उस समय सामने आया जब वार्ड क्रमांक 2 पटोराटोला निवासी नर्बदा प्रसाद यादव ने कलेक्टर जनसुनवाई में लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई।
शिकायतकर्ता नर्बदा प्रसाद यादव ने बताया कि उनके मकान का नगर पालिका टैक्स और डायवर्सन टैक्स बकाया था। इसी दौरान वार्ड के निर्वाचित भाजपा पार्षद संजय चौधरी उर्फ डॉक्टर ने उनसे संपर्क कर कहा कि वह पूरा टैक्स जमा करवा देंगे। आरोप है कि पार्षद ने नगर पालिका टैक्स एवं डायवर्सन शुल्क जमा कराने के नाम पर 11 हजार 500 रुपये नगद ले लिए और भरोसा दिलाया कि दो-तीन दिन में सभी रसीदें घर पहुंचा दी जाएंगी।
लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार एक वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो कोई रसीद दी गई और न ही टैक्स जमा हुआ। उल्टा अब नगर पालिका कर्मचारी उनके घर पहुंचकर दोबारा टैक्स की वसूली कर रहे हैं। जब नर्बदा प्रसाद यादव ने अधिकारियों को बताया कि पूरी राशि पार्षद को दे दी गई है, तब उन्हें जानकारी मिली कि नगर पालिका में उनके मकान के नाम से कोई राशि जमा ही नहीं हुई।
पीड़ित मजदूर ने आरोप लगाया कि जब भी वह अपना पैसा वापस मांगता है, तब पार्षद केवल “आज-कल करा दूंगा” कहकर टालमटोल करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार का कहना है कि मजदूरी कर जोड़-जोड़कर जमा किए गए पैसे इस तरह हड़प लेना जनप्रतिनिधि की गरिमा और जनता के विश्वास दोनों के साथ धोखा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि जनता द्वारा चुना गया प्रतिनिधि ही गरीबों के साथ इस तरह का व्यवहार करेगा, तो आम आदमी आखिर न्याय की उम्मीद किससे करेगा? जनसेवा और जनता की समस्याओं के समाधान का दावा करने वाली राजनीति यदि गरीबों की मेहनत की कमाई पर ही डाका डालने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या एक गरीब मजदूर को उसकी मेहनत की कमाई वापस मिलेगी? क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? या फिर मामला राजनीतिक संरक्षण की भेंट चढ़ जाएगा?
फिलहाल जनसुनवाई में दर्ज इस शिकायत ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।


