_वर्षों से जारी अटैचमेंट व्यवस्था पर मालती मुकेश डेहरिया ने जताई नाराजगी, उच्चस्तरीय जांच की मांग_
सिवनी – जिले के विभिन्न शासकीय विभागों में वर्षों से चली आ रही संलग्नीकरण (अटैचमेंट) व्यवस्था को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष मालती मुकेश डेहरिया ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। शुक्रवार को जिला पंचायत सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश शासन एवं हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जिले में नियम विरुद्ध अटैचमेंट व्यवस्था अब भी जारी है, जो शासन की मंशा और न्यायालय के आदेशों के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि जिला पंचायत सहित कई शासकीय विभागों में अधिकारी और कर्मचारी वर्षों से अपनी मूल पदस्थापना छोड़कर अटैचमेंट के माध्यम से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। जबकि शासन एवं न्यायालय द्वारा ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों को उनकी मूल पदस्थापना पर वापस भेजने के निर्देश पूर्व में जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद आदेशों का पालन नहीं होना प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों और विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की कमी के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ कार्यालयों में आवश्यकता से अधिक कर्मचारी अटैचमेंट के माध्यम से पदस्थ हैं, जिससे प्रशासनिक संतुलन बिगड़ रहा है और जनहित प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस विषय को लेकर कई बार जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंजली शाह को पत्र लिखकर नियम विरुद्ध अटैचमेंट समाप्त करने तथा संबंधित कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना पर भेजने की मांग की गई है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
प्रेस वार्ता के दौरान श्रीमती डेहरिया ने सवाल उठाया कि जब शासन और हाईकोर्ट दोनों के स्पष्ट आदेश मौजूद हैं, तब उनका पालन सुनिश्चित कराने में प्रशासनिक स्तर पर इतनी उदासीनता क्यों दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए वैध और नियमसम्मत मुद्दों को भी लगातार नजरअंदाज किया जाएगा, तो सुशासन और जवाबदेही की अवधारणा कमजोर होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि शासन के नियमों का पालन सुनिश्चित कराना और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। एक जनप्रतिनिधि और भारतीय जनता पार्टी की कार्यकर्ता होने के नाते उनकी प्राथमिकता जनहित और सुशासन है।
अंत में जिला पंचायत अध्यक्ष ने मांग की कि जिले के सभी शासकीय विभागों में अटैचमेंट व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर नियम विरुद्ध संलग्नीकरण को तत्काल समाप्त किया जाए। साथ ही शासन और न्यायालय के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।


