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June 16, 2026
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बंगाल शराब घोटाला: भाजपा का आरोप- बोतल निर्माताओं से वसूली गई रकम टीएमसी तक पहुंची


कोलकाता, 7 जून । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल प्रमुख और पश्चिम बंगाल के केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित मालवीय ने रविवार को राज्य की पूर्व तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर कथित शराब आबकारी घोटाले को लेकर गंभीर आरोप लगाए।


अमित मालवीय ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि राज्य के आबकारी विभाग ने शराब नीति में बदलाव कर शराब और बीयर की हर खेप (क्रेट) पर बोतल निर्माताओं से अवैध वसूली की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वसूली से जुटाई गई हजारों करोड़ रुपये की रकम तृणमूल कांग्रेस और उसके महासचिव अभिषेक बनर्जी तक पहुंचाई गई।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए मालवीय ने लिखा, “दिल्ली शराब आबकारी घोटाले के बाद अब बंगाल की बारी है। आबकारी विभाग ने नीति में बदलाव कर शराब और बीयर की हर खेप पर बोतल निर्माताओं से वसूली की। हजारों करोड़ रुपये की यह राशि तृणमूल कांग्रेस और अभिषेक बनर्जी तक पहुंची।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 में तत्कालीन तृणमूल सरकार के कार्यकाल में राज्य की शराब नीति में बदलाव किया गया, जिससे शराब वितरण व्यवस्था पर सरकारी नियंत्रण स्थापित हो गया। आरोप है कि नई आबकारी नीति के जरिए निजी थोक विक्रेताओं पर भारी शुल्क और लेवी लगाने का दबाव बनाया गया।

बताया गया है कि आबकारी विभाग की एक गोपनीय रिपोर्ट में इस नीति को कार्टेलाइजेशन रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने, राज्य के सभी हिस्सों में शराब की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प देने के नाम पर लागू किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, यह दस्तावेज पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को भी इस मामले की जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वितरकों की व्यवस्था केवल सरकार के राजस्व में वृद्धि के लिए नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इसमें दावा किया गया है कि वितरकों के मुनाफे का एक हिस्सा सरकारी खजाने में जाने के बजाय तृणमूल कांग्रेस तक पहुंचता था।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रत्येक क्रेट पर गोदाम किराये के नाम पर 4 रुपये और परिवहन शुल्क के नाम पर 3 रुपये अतिरिक्त वसूले जाते थे। विदेशी शराब निर्माताओं और बोतल कंपनियों को यह शुल्क देने के लिए मजबूर किया गया और आरोप है कि यही राशि आगे चलकर अभिषेक बनर्जी तक पहुंचती थी।

हालांकि, इन आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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