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जहाँ कभी पानी के लिए संघर्ष था, आज हर घर में बह रही है खुशहाली की धारा
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र में स्थित ग्राम कनिया कभी पेयजल संकट की गंभीर समस्या से जूझता हुआ एक ऐसा गांव था, जहाँ जीवन का हर दिन पानी की तलाश से शुरू होता था। विकासखंड बिरसा की ग्राम पंचायत कनिया के अंतर्गत आने वाला यह आदिवासी बहुल ग्राम जिला मुख्यालय से लगभग 104 किलोमीटर दूर स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर होने के बावजूद यहां के ग्रामीणों के लिए स्वच्छ पेयजल एक सपना बनकर रह गया था।
गांव की महिलाएं सुबह होते ही सिर पर मटके और बर्तन लेकर दूर-दूर स्थित कुओं, हैंडपम्पों और जलस्रोतों की ओर निकल पड़ती थीं। कई किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा के बाद उन्हें पानी मिल पाता था। गर्मी की तपती दोपहर हो या बरसात की फिसलन भरी राहें, पानी लाना उनकी मजबूरी थी। परिवार का बड़ा हिस्सा प्रतिदिन केवल पानी जुटाने में ही अपना बहुमूल्य समय और श्रम खर्च कर देता था।
इस समस्या का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं और बच्चों पर पड़ता था। बच्चों की पढ़ाई बाधित होती थी क्योंकि उन्हें भी पानी लाने के काम में परिवार का सहयोग करना पड़ता था। वहीं दूषित जल के उपयोग से ग्रामीणों में जलजनित बीमारियां आम थीं, जिससे स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति दोनों प्रभावित होती थीं। लेकिन वर्ष 2023 में ग्राम कनिया के जीवन में बदलाव की एक नई किरण लेकर आया जल जीवन मिशन। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, बालाघाट द्वारा ग्राम में ₹161.96 लाख की लागत से नल-जल प्रदाय योजना का कार्य 14 अप्रैल 2023 को प्रारंभ किया गया। यह केवल एक परियोजना नहीं थी, बल्कि ग्रामवासियों के जीवन को नई दिशा देने वाला विकास का संकल्प था।
योजना के अंतर्गत 1774 जनसंख्या वाले इस ग्राम में आधुनिक जलापूर्ति व्यवस्था विकसित की गई। 125 किलोलीटर क्षमता का उच्चस्तरीय जलाशय (ओवरहेड टैंक) तथा 40 किलोलीटर क्षमता का सम्पवेल निर्मित किया गया। साथ ही 365 घरों को घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए गए, जिससे पहली बार हर घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की सुविधा सुनिश्चित हुई। आज ग्राम कनिया की पहचान बदल चुकी है। जिन महिलाओं के कंधे वर्षों तक पानी के बोझ से झुके रहते थे, उनके चेहरों पर अब आत्मविश्वास और संतोष की मुस्कान दिखाई देती है। घरों में नल से पानी उपलब्ध होने के कारण उनका समय और श्रम बच रहा है, जिसे वे अब परिवार, बच्चों की शिक्षा और अन्य उत्पादक कार्यों में लगा रही हैं।
गांव के बच्चे अब पानी लाने की चिंता से मुक्त होकर नियमित रूप से विद्यालय जा रहे हैं। शिक्षा के प्रति उनका रुझान बढ़ा है और उनके सपनों को नई उड़ान मिली है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से जलजनित बीमारियों में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे ग्रामीणों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और चिकित्सा पर होने वाला खर्च भी कम हुआ है। जल जीवन मिशन ने केवल पानी की सुविधा नहीं दी, बल्कि ग्रामवासियों को सम्मान, स्वास्थ्य, समय और बेहतर जीवन का अधिकार प्रदान किया है। यह योजना ग्रामीण विकास और सामाजिक परिवर्तन का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।
ग्राम कनिया के निवासी भावुक होकर बताते हैं कि कभी जिस पानी के लिए घंटों संघर्ष करना पड़ता था, वह आज उनके घरों तक सहजता से पहुँच रहा है। वे इस ऐतिहासिक परिवर्तन के लिए भारत सरकार, मध्यप्रदेश शासन तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, बालाघाट के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। आज कनिया ग्राम विकास की नई कहानी लिख रहा है। यहां हर घर में बहता स्वच्छ जल केवल सुविधा का प्रतीक नहीं, बल्कि एक बेहतर और सम्मानजनक जीवन की पहचान बन चुका है। “जहाँ कभी प्यास संघर्ष थी, वहाँ आज हर घर में जल का मधुर संगीत गूँज रहा है। जल जीवन मिशन ने कनिया ग्राम में विकास, स्वास्थ्य और खुशहाली की नई धारा प्रवाहित कर दी है।”


