छपारा- पत्रकारों के सवाल पर पूर्व सांसद-विधायक श्रीमती नीता पटेरिया ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन दाखिल हुआ और निरस्त हो गया। कांग्रेस इसे नारी सम्मान से जोड़कर देख रही है, जबकि नामांकन निरस्त होना कांग्रेस की अंतर्कलह, गुटबाजी, षड्यंत्र और नाकामी का परिणाम है।
कांग्रेस नारी सम्मान को केवल नारों और भाषणों तक ही सीमित रखती है। सब जानते हैं कि कांग्रेस के नेता समय-समय पर महिलाओं के लिए कैसी-कैसी भद्दी टिप्पणियां करते हैं। नैना साहनी कांड, सरला मिश्रा कांड जैसे मामले ऐसे हैं कि आज भी याद करने पर मन में दहशत हो जाती है। इतने खतरनाक कांड थे।
आज कांग्रेस जो आंदोलन कर रही है और नारी सम्मान की बात कर रही है, वह केवल दिखावा है। यह लोगों का ध्यान भटकाने का एक अवसर ढूंढ रहे हैं। वास्तविकता यही है कि निर्वाचन की प्रक्रिया पारदर्शी है। नामांकन निरस्त होना मतदाताओं से मीनाक्षी नटराजन द्वारा शपथ पत्र में जानकारी छुपाने का परिणाम है।
हम सब जानते हैं कि मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना की कांग्रेस प्रभारी रही हैं। उस समय कांग्रेस नेता शिव कुमार रेड्डी थे। एक कांग्रेस नेत्री ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई कि शादी का झांसा देकर कई वर्षों तक उनका शोषण किया गया, उन्हें ब्लैकमेल किया गया और बाद में शादी नहीं की।
शिकायतकर्ता महिला ने मीनाक्षी नटराजन से, जो तेलंगाना की प्रभारी थीं और स्वयं एक महिला हैं, बार-बार मदद की गुहार लगाई कि शिव कुमार रेड्डी पर कार्रवाई की जाए। लेकिन ना पार्टी की तरफ से उनका निलंबन हुआ, ना ही कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई।
अंत में महिला को एफआईआर दर्ज करनी पड़ी। उन्होंने सभी नेताओं से मदद मांगी, मीनाक्षी नटराजन से भी मदद मांगी, लेकिन किसी ने शिकायतकर्ता महिला की बात पर ध्यान नहीं दिया। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उसमें एक पक्ष मीनाक्षी नटराजन को भी बनाया गया है। मीनाक्षी नटराजन ने स्वयं अपना पक्ष न्यायालय में प्रस्तुत किया है।
इसका अर्थ है कि मीनाक्षी नटराजन को केस की पूरी जानकारी थी, क्योंकि समन प्राप्त होने पर उन्होंने कोर्ट में अपना पक्ष रखा था। लेकिन मीनाक्षी नटराजन ने यह जानकारी मतदाताओं से छुपाई। शपथ पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया गया। निर्वाचन आयोग ने कानूनी प्रक्रिया का निर्वहन करते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ नामांकन पत्र को निरस्त किया।
एक प्रमुख समाचार चैनल में शिकायतकर्ता महिला ने इंटरव्यू के दौरान बार-बार कहा कि उन्होंने मीनाक्षी नटराजन से कई बार कहा कि मेरी मदद करो क्योंकि वह स्वयं महिला हैं और कांग्रेस की प्रभारी थीं। कांग्रेस के पदाधिकारियों से भी सहयोग मांगा, परंतु किसी ने सहयोग नहीं किया।
वर्तमान में जो नामांकन निरस्त हुआ, हम सब जानते हैं कि तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार है। वहां से फाइल लेकर आना और मध्यप्रदेश में देना, यह कांग्रेस के उन लोगों का पूरा षड्यंत्र है जो स्वयं राज्यसभा में जाना चाहते होंगे। मीनाक्षी नटराजन का यहां से नामांकन कांग्रेस के नेता पचा नहीं पा रहे होंगे, इसलिए उन्होंने स्वयं षड्यंत्र किया। यह उनका अंतर्कलह का परिणाम है।
उन्होंने फाइल ढूंढी, कागज लाए और कागज सामने रखे, जो उचित भी है क्योंकि मीनाक्षी नटराजन ने शपथ पत्र में बताया नहीं था। लेकिन इसमें भारतीय जनता पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। भारतीय जनता पार्टी हमेशा महिलाओं का सम्मान करती है। महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण देना चाहती है और प्रस्ताव लेकर आई, परंतु कांग्रेस जो महिला विरोधी है, उसकी नीतियों और विचारधारा का परिणाम है कि मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा का नामांकन निरस्त हुआ।
कांग्रेस ने लोकसभा में बिल पास नहीं होने दिया। 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को नहीं मिलने दिया। यह अपने आप प्रदर्शित करता है कि कांग्रेस की मानसिकता महिला विरोधी है।


