जबलपुर। मध्यप्रदेश शासन के ऊर्जा विभाग द्वारा बिजली कंपनियों में संविदा आधार पर कार्यरत अनुकंपा नियुक्त कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए नई अनुकंपा नियुक्ति नीति लागू किए जाने का मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने स्वागत किया है। फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी.पी. पाठक ने कहा कि यह निर्णय सराहनीय है, लेकिन नीति में मौजूद विसंगतियों को दूर किए बिना कर्मचारियों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल सकेगा।
पाठक ने बताया कि नई नीति में 8 से 10 वर्ष की संविदा सेवा को वरिष्ठता में समुचित महत्व नहीं दिया गया है। वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को नई भर्ती के समान माना जा रहा है, जिससे वरिष्ठता और वेतन संबंधी असमानता पैदा होगी। वर्तमान में 27 से 28 हजार रुपये मानदेय प्राप्त कर रहे कर्मचारियों के वेतन में कमी आने की आशंका है, जबकि वेतन संरक्षण का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सीपीसीटी लागू होने से पहले नियुक्त कर्मचारियों को पात्रता में छूट मिलनी चाहिए।
फेडरेशन ने मांग की है कि कर्मचारियों को मूल नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता का लाभ दिया जाए, संविदा सेवा अवधि को वेतन निर्धारण और पदोन्नति में जोड़ा जाए, वेतन संरक्षण सुनिश्चित किया जाए तथा सीपीसीटी से छूट या कार्यानुभव को उसके समकक्ष माना जाए। साथ ही, नीति में संशोधन होने तक सभी पात्र अनुकंपा कर्मचारियों को बिना किसी शर्त के नियमित नियुक्ति देने की मांग की गई है।


