November 2, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

सफलता की कहान
आजीविका दीदी उमा देवी ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर चुनी आत्मनिर्भरता की राह


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मनिहारी दुकान से शुरू किया स्वरोजगार का सफर, बच्चों के कपड़ों की दुकान और सिलाई व्यवसाय से परिवार को बनाया आत्मनिर्भर
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शहडोल 31 अक्टूबर 2026- स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ ही अपने परिवार की आजीविका को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी आजीविका दीदी उमा देवी की है, जिन्होंने भारत माता स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह चुनी और अपने परिश्रम एवं लगन से स्वरोजगार का सफर तय किया।

उमा देवी वर्ष 2013 से भारत माता स्व-सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने मनिहारी की दुकान संचालित कर स्वरोजगार की शुरुआत की। इसके बाद अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए बच्चों के कपड़ों की दुकान शुरू की। साथ ही उन्होंने सिलाई कार्य को भी अपने व्यवसाय के रूप में अपनाया। निरंतर मेहनत और लगन से उन्होंने अपने स्वरोजगार को आगे बढ़ाया।

आज उमा देवी इन व्यवसायों के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 25 से 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनका परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना है और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में उन्हें आर्थिक सहयोग मिल रहा है।

उमा देवी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं अपने हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं। उनका स्वरोजगार का सफर अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

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