नर्मदा सेवा सफाई समिति के सील कार्यालय की तलाशी में अहम दस्तावेज जब्त
3 करोड़ से अधिक की आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच का दायरा बढ़ा
जबलपुर। आय से अधिक संपत्ति के मामले में घिरे नगर निगम के प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पोलाराव की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए यादव कॉलोनी स्थित नर्मदा सेवा सफाई समिति के सील कार्यालय को खोलकर गहन तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान साझेदारी और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
जांच एजेंसी का मानना है कि पोलेराव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सफाई समिति में भारी निवेश किया और कथित तौर पर 3 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की। अब EOW की नजर उनके करीबी दोस्तों, रिश्तेदारों और सहयोगियों पर भी है, जिनके नाम पर बेनामी संपत्तियां और बैंक खाते होने की आशंका जताई जा रही है।
इससे पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरण में EOW की तीन टीमों ने जेडीए स्कीम-11 स्थित पोलाराव के आवास और कार्यालय पर एक साथ छापेमार कार्रवाई की थी। उस दौरान करोड़ों रुपये की संपत्ति और निवेश से जुड़े दस्तावेज सामने आए थे। अब जांच अधिकारी उन बैंक खातों, जमीनों और अन्य निवेशों की भी पड़ताल कर रहे हैं, जो कथित रूप से करीबी लोगों के नाम पर किए गए हैं।
25 वार्डों के सफाई ठेके पर भी जांच
सूत्रों के अनुसार, जब्त दस्तावेजों से पता चला है कि विवादित समिति के पास शहर के करीब 25 वार्डों की सफाई का ठेका है। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग का प्रभार मिलने के बाद पोलाराव ने अपनी पसंदीदा समितियों को अनुचित लाभ पहुंचाते हुए उन्हें ठेके दिलवाए और उन्हीं के माध्यम से निवेश कर आर्थिक लाभ अर्जित किया।
अब EOW यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा अवैध कमाई को छिपाने के लिए किन-किन व्यक्तियों का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी सभी संदिग्धों की सूची तैयार कर रही है और जल्द ही कई अन्य लोगों से पूछताछ की संभावना जताई जा रही है।


