कोतमा /अनूपपुर जिले में जनजातीय कार्य विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है मामला लोकायुक्त की कार्रवाई का सामना कर चुके एक अधिकारी को नियम-कायदों को ताक पर रखकर महत्वपूर्ण प्रभार देने और अब ट्रांसफर होने के बाद उसे रुकवाने के लिए राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करने का है
ताजा घटनाक्रम में, जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थ मंडल संयोजक संतोष कुमार बाजपेई (जिन्हें क्षेत्र संयोजक का प्रभार भी मिला हुआ है) का आगामी 17 जून 2026 को कटनी जिले के लिए तबादला कर दिया गया है लेकिन इस तबादले के साथ ही विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद भी ‘मेहरबानी’ क्यों
जानकारों और विभागीय सूत्रों के अनुसार, संतोष कुमार बाजपेई जब जैतहरी जनपद पंचायत में पदस्थ थे, तब लोकायुक्त पुलिस ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई की थी सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के स्पष्ट नियम हैं कि लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू (EOW) या गंभीर विभागीय जांच का सामना कर रहे दागी अधिकारियों को फील्ड की महत्वपूर्ण या प्रभार वाली पोस्टिंग (लूप लाइन से बाहर) नहीं दी जानी चाहिए
इसके बावजूद, नियमों को दरकिनार करते हुए बाजपेई को न केवल अनूपपुर में बनाए रखा गया, बल्कि उन्हें मंडल संयोजक के साथ-साथ क्षेत्र संयोजक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया
आखिर किस नियम के तहत एक दागी अधिकारी को इतना महत्वपूर्ण प्रभार देकर उपकृत किया गया
तबादला होते ही ‘भोपाल’ की शरण में साहब
सूत्रों का कहना है कि 17 जून को कटनी ट्रांसफर किए जाने के आदेश के बाद से ही विभाग में खलबली मची है चर्चा है कि संतोष कुमार बाजपेई अपनी नई पदस्थापना पर जाने के बजाय, इस ट्रांसफर को निरस्त करवाने या स्टे लगवाने के लिए भोपाल के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं रसूखदारों के जरिए मंत्रालय (वल्लभ भवन) का दरवाजा खटखटाया जा रहा है ताकि अनूपपुर का ‘मोह’ न छूटे
उठ रहे हैं गंभीर सवाल
नियमों की अनदेखी
क्या जनजातीय कार्य विभाग में ईमानदार और योग्य अधिकारियों की कमी है, जो लोकायुक्त की कार्रवाई झेल चुके व्यक्ति को दोहरे प्रभार सौंपे गए
यदि ट्रांसफर होने के बाद भी अधिकारी भोपाल से दबाव बनाकर आदेश बदलवा लेते हैं, तो शासन के ‘जीरो टॉलरेंस’ (भ्रष्टाचार पर शून्य सहिष्णुता) के दावों का क्या होगा
अब देखना यह होगा कि अनूपपुर जिला प्रशासन और जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं क्या बाजपेई को तत्काल कार्यमुक्त कर कटनी भेजा जाएगा, या फिर भोपाल के ‘आशीर्वाद’ से नियमों को एक बार फिर ठेंगा दिखा दिया जाएगा


