मोहबर्रा–सारसडोल मार्ग पर सड़क दो हिस्सों में टूटी, किसानों के घरों और खेतों में घुसा पानी
उगली – केवलारी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत उप तहसील उगली मुख्यालय से लगभग 2 किलोमीटर दूर स्थित मोहबर्रा–सारसडोल मार्ग पर करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित सड़क पहली ही मूसलाधार बारिश की परीक्षा में फेल होती नजर आई। करीब एक माह पहले बनी लगभग 3.5 करोड़ रुपये लागत की सड़क तेज बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, मोहबर्रा और सारसडोल ग्रामों को जोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा सड़क निर्माण कराया जा रहा है। वहीं मार्ग पर लगभग 1.5 करोड़ रुपये की लागत से 4 मीटर ऊंचा पुल भी निर्माणाधीन है। पुल से करीब 200 मीटर पहले खेतों के पानी की निकासी के लिए बनाई गई पुलिया (मोघों) के पास तेज बहाव के कारण सड़क बीच से टूट गई, जिससे आवागमन प्रभावित हो गया।
क्षेत्र में लगातार दो दिनों से हुई भारी बारिश के बाद जब मौके का जायजा लिया गया तो सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क किनारे पानी निकासी के लिए नालियों का निर्माण नहीं किया गया, जिसके कारण बारिश का पानी सीधे उनके घरों और खेतों में घुस गया।
ग्रामीण किसानों ने बताया कि सड़क किनारे लगाए गए मोघों से तेज बहाव का पानी सीधे खेतों में पहुंचा, जिससे खेतों में बने तालाब टूट गए और खरीफ की फसलों को नुकसान हुआ। कई किसानों के घरों में भी पानी भर गया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
*ठेकेदार ने दी सफाई*
निर्माण एजेंसी के ठेकेदार आशीष जायसवाल (लामता, बालाघाट) ने कहा कि सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत एस्टीमेट के अनुसार किया गया है। उनके अनुसार, परियोजना में नाली निर्माण का प्रावधान नहीं था। उन्होंने बताया कि 4 मीटर ऊंचे पुल का निर्माण अभी प्रगतिशील है और बारिश समाप्त होने के बाद शेष कार्य पूरा किया जाएगा। उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति प्राकृतिक आपदा के कारण उत्पन्न हुई है, जिसके लिए निर्माण एजेंसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
*ग्रामीणों में नाराजगी, जांच की मांग*
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से लंबित इस सड़क की मांग पूरी होने पर लोगों को बेहतर आवागमन की उम्मीद थी, लेकिन पहली ही बारिश में सड़क टूटने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। उनका आरोप है कि उचित जल निकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण खेतों और घरों को नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई तथा प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।
**ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क और पुल निर्माण में तकनीकी मानकों का पालन किया गया होता तथा जल निकासी की समुचित व्यवस्था बनाई गई होती, तो पहली ही बारिश में ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई और जांच पर टिकी हुई है।


