July 3, 2026
सी टाइम्स
इनसाइट टुडे

खाद के बढ़े दाम वापस ले सरकार – आनंद बिसेन


किसानों की कमर तोड़ने वाली नीतियों के खिलाफ मुखर हुए जिला सचिव आनंद बिसेन, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी*
*बालाघाट।* बालाघाट जिला सरपंच संघ के प्रखर जिला सचिव एवं जिले की प्रवेश नगरी कंजई के प्रथम नागरिक, वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद बिसेन ने केंद्र व मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। किसानों के हक में सदैव तत्पर रहने वाले जनप्रिय नेता श्री बिसेन ने सीधे तौर पर सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को पत्र प्रेषित कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने मांग की है कि बालाघाट सहित पूरे प्रदेश में खाद (सोडा) की बेतहाशा बढ़ी हुई कीमतों को तत्काल प्रभाव से कम किया जाए और सहकारी समितियों में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि भोले-भाले किसानों को बिचौलियों और मुनाफाखोर व्यापारियों के हाथों लुटने से बचाया जा सके।
श्री बिसेन ने वर्तमान सरकार के दावों की पोल खोलते हुए तीखा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहाँ सरकार साल में महज 6 हजार रुपये देकर किसानों के सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं दूसरी तरफ खाद, बीज, डीजल, बिजली और कृषि उपकरणों के दामों में बेतहाशा वृद्धि कर किसानों की पीठ में छुरा घोंपने का काम कर रही है। भाजपा सरकार की इन जनविरोधी नीतियों ने आज संपन्न खेती को घाटे का सौदा बना दिया है। सरकार की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। एक ओर किसानों की आय दोगुनी करने के खोखले वादे किए जाते हैं, तो दूसरी ओर आर्थिक संकट से जूझ रहे अन्नदाता पर महंगाई का भारी बोझ लादकर उसकी कमर तोड़ी जा रही है।
खाद की कीमतों में हुई ऐतिहासिक वृद्धि के आंकड़ों को उजागर करते हुए जुझारू नेता आनंद बिसेन ने बताया कि जो खाद की बोरी पहले 1350 रुपये में मिल रही थी, सरकार ने उसे बढ़ाकर सीधे 2100 रुपये कर दिया है। इसी तरह, 1450 रुपये वाली खाद की बोरी का दाम अब 2450 रुपये के पार पहुँच चुका है। प्रति 50 किलो की बोरी पर लगभग 1000 रुपये की यह भारी भरकम वृद्धि सीधे तौर पर किसानों की जेब पर डाका है। इसके विपरीत, चुनाव के समय सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल देने का लोकलुभावन वादा किया था, जिसे तीन साल बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं किया गया है। लागत लगातार आसमान छू रही है और किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण आज का अन्नदाता कर्ज के गहरे दलदल में डूबने को मजबूर है।
खुद को किसान का बेटा बताते हुए एडवोकेट आनंद बिसेन ने सरकार को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि वे किसानों के मान-सम्मान और उनके अधिकारों के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे। यदि सरकार ने बढ़े हुए दामों को जल्द वापस नहीं लिया और सोडे की पर्याप्त आपूर्ति बहाल नहीं की, तो वे समस्त किसान भाइयों को एकजुट कर ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक एक बड़ा और उग्र आंदोलन, धरना प्रदर्शन करने को विवश होंगे।

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