नई दिल्ली, 4 जुलाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि ई-जागृति प्लेटफॉर्म उपभोक्ता शिकायतों की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर कई बड़ी चुनौतियों का समाधान कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म उपभोक्ता शिकायत दर्ज होने से लेकर उसके निपटारे तक की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पेपरलेस बनाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी द्वारा लिखे गए ई-जागृति प्लेटफॉर्म पर आधारित एक लेख को शेयर किया और कहा कि व्यापक स्तर पर विभिन्न हितधारकों से चर्चा और सुझाव लेने के बाद ई-जागृति को और बेहतर बनाया गया है, जिससे उपभोक्ता न्याय व्यवस्था को भी डिजिटल सुधारों के दायरे में लाया गया है। अपने लेख में प्रल्हाद जोशी ने लिखा कि आज उपभोक्ता बड़ी संख्या में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, डिजिटल भुगतान प्रणालियों और ऑनलाइन मार्केटप्लेस के माध्यम से लेनदेन कर रहे हैं। ऐसे में पारंपरिक उपभोक्ता न्याय प्रणाली, जिसमें कागजी फाइलिंग, मैनुअल जांच, अलग-अलग सॉफ्टवेयर और व्यक्तिगत रूप से सुनवाई की व्यवस्था थी, तेजी से बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं रह गई थी। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा केवल कानूनों में बदलाव से संभव नहीं थी, बल्कि न्याय वितरण की पूरी व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाना भी जरूरी था।
1 जनवरी 2025 को शुरू किए गए ई-जागृति प्लेटफॉर्म ने चार पुराने सिस्टम ओसीएमएस, ई-दाखिल, राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) सीएमएस और कन्फोनेट को एकीकृत कर एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)-आधारित, पेपरलेस डिजिटल प्लेटफॉर्म में बदल दिया है। सरकार के अनुसार, लॉन्च होने के बाद से इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 2.29 लाख से अधिक उपभोक्ता मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 2.07 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया गया है। इस तरह प्लेटफॉर्म ने 90.75 प्रतिशत का कुल निपटान दर हासिल की है। इससे देश और विदेश में रहने वाले उपभोक्ताओं को कहीं से भी ऑनलाइन न्याय प्राप्त करने की सुविधा मिल रही है। सरकार ने बताया कि इस प्लेटफॉर्म की मदद से अब प्रवासी भारतीय (एनआरआई) भी भारत लौटे बिना अपनी उपभोक्ता शिकायतों का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश भर के उपभोक्ता आयोगों के प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। इस अवधि में 1.65 लाख से अधिक नए मामले दर्ज हुए, जबकि 1.52 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया गया। इससे मामलों के निपटान की दर बढ़कर 92.3 प्रतिशत हो गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 89.47 प्रतिशत के मुकाबले अधिक है। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च) के दौरान भी उपभोक्ता आयोगों का प्रदर्शन मजबूत रहा। इस अवधि में 38,944 नए मामले दर्ज किए गए, जबकि 34,600 मामलों का निपटारा किया गया, जिससे 88.84 प्रतिशत की निपटान दर हासिल की गई, जो पिछले वित्त वर्ष 2025 की समान अवधि की तुलना में बेहतर रही। —


