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July 4, 2026
सी टाइम्स
इनसाइट टुडे

करोड़ों का सीएम राइज स्कूल शुभारंभ से पहले ही दरका! निर्माण एजेंसी, उपयंत्री और पीआईयू की कार्यशैली पर गंभीर सवाल


उद्घाटन से पहले दीवारों में दरारें, बच्चों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा; तकनीकी जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठी मांग
बदरा (अनूपपुर)। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी सीएम राइज (सांदीपनि) विद्यालय योजना के तहत करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे बदरा के नवीन विद्यालय भवन की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। विडंबना यह है कि भवन का अभी विधिवत शुभारंभ भी नहीं हुआ है, लेकिन कई स्थानों पर दीवारों में दरारें दिखाई देने लगी हैं। इससे निर्माण एजेंसी, निर्माण की निगरानी कर रहे उपयंत्री तथा परियोजना के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार पीआईयू  विभाग की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है।
करीब दो वर्ष से निर्माणाधीन यह विद्यालय भवन अंतिम चरण में है। यहां कक्षा पहली से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के अध्ययन की व्यवस्था की जानी है। ऐसे में उद्घाटन से पहले ही भवन में दरारें उभरना न केवल निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि भविष्य में अध्ययन करने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई तथा निर्माण एजेंसी ने मनमाने तरीके से कार्य कराया। लोगों का कहना है कि यदि भवन की शुरुआत में ही ऐसी स्थिति है तो कुछ वर्षों बाद इसकी मजबूती और सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य की नियमित तकनीकी निगरानी करने वाले उपयंत्री और पीआईयू के जिम्मेदार अधिकारियों ने भी अपनी जिम्मेदारियों का समुचित निर्वहन नहीं किया, जिसके कारण निर्माण में संभावित खामियां समय रहते नहीं रोकी जा सकीं।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की किसी स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ समिति से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, कार्य की तकनीकी स्वीकृतियों और भुगतान प्रक्रिया की भी जांच हो। यदि जांच में निर्माण एजेंसी, संबंधित उपयंत्री अथवा पीआईयू के अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उनके विरुद्ध कठोर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि शिक्षा के मंदिर में भ्रष्टाचार या लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि से निर्मित भवन यदि उद्घाटन से पहले ही दरकने लगे तो यह पूरे निर्माण तंत्र की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभाग पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर मामले में निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई करते हैं।

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